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सादाबाद 08 जुलाई। क्षेत्र के गांवों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। आज तड़के नगला छत्ती गांव में बंदरों के हमले में एक किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना ने ग्रामीणों में दहशत और चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लोग घरों की छतों पर जाने और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, नगला छत्ती निवासी 15 वर्षीय बरखा पुत्री बबली खां सुबह अपने घर की छत पर झाडू लगा रही थी। इसी दौरान अचानक बंदरों का एक झुंड छत पर आ गया और उसने किशोरी पर हमला कर दिया। बरखा ने खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन एक बंदर ने उसके हाथ को बुरी तरह काट लिया। किशोरी की चीख-पुकार सुनकर परिजन दौड़कर छत पर पहुंचे और किसी तरह बंदरों को भगाया। घायल बरखा को तुरंत उपचार के लिए एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां उसके हाथ में गहरे घाव होने के कारण सात टांके लगाने पड़े। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने की भी सलाह दी। ग्रामीणों का कहना है कि बिसावर और आसपास के गांवों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये बंदर घरों की छतों पर चढ़कर उत्पात मचाते हैं और मौका मिलते ही महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों पर हमला कर देते हैं। पिछले कुछ महीनों में कई लोग बंदरों के हमले का शिकार होकर घायल हो चुके हैं। सीएचसी में भी बंदरों के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग से शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक बंदरों को पकड़ने या उन्हें आबादी से दूर करने के लिए कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया है।

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