
सिकन्दराराऊ (हसायन) 05 जुलाई। विकासखंड क्षेत्र के गांव कानऊ में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के दौरान काश्तकार (किसानों) ने राजस्व चकबंदी विभाग के द्वारा नियम विरूद्ध की जा रही चकबंदी के कार्य को लेकर काश्तकारों में आक्रोश व्याप्त है।चकबंदी विभाग के जिम्मेदारों की मनमानी भरी कार्य प्रणाली व प्रशासनिक अधिकारियो की अनदेखी के कारण क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों में चल रही चकबंदी की कार्य प्रक्रिया का विरोध करते हुए चकबंदी विभाग पर हर रोज भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के तमाम आरोप लगने के बाद भी जिम्मेदार मूक दर्शक बनकर काश्तकारों का जमीनी स्तर पर मानसिक व आर्थिक दृष्टि से भूमि जमीन का जमकर शोषण किया जा रहा है।गांव कानऊ में चकबंदी विभाग के स्थानीय हल्का लेखपाल व अन्य कर्मचारियो के द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाए नियमों के विपरीत नियम विरूद्ध तरीके से काश्तकारों के खुलेआम शोषण किए जा रहे।कानऊ के ग्रामीणों ने चकबंदी विभाग की चकबंदी कार्य प्रक्रिया को लेकर नायब तहसीलदार के सामने चकबंदी की कार्य प्रक्रिया का खुला विरोध करते हुए चकबंदी विभाग पर भ्रष्टाचार में संलिप्त रहकर मनमाने तरीके से मोटा धन बसूलकर जमीन के चक को इधर से उधर करते हुए उडान चक बनाए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। काश्कारो किसानों का कहना है कि उनकी वर्षों पुरानी कृषि भूमि को चकबंदी विभाग के स्थानीय हल्का कर्मचारियो ने उच्च स्तरीय अधिकारियो के साथ धनाढय स्तर के काश्तकार दलालों के साथ मिलकर नियमों के विपरीत नियम विरूद्ध तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।जबकि चकबंदी विभागके अधिकारियो कहना है कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह नियमानुसार अपील कर सकता है।गांव कानऊ निवासी किसान धर्मेंद्र कुमार,सचिन कुमार,सनी कुमार पुत्रगण स्वर्गीय वीरेशपाल तथा मंजू देवी पत्नी स्वर्गीय वीरेशपाल सिंह ने बताया कि उनका गाटा संख्या नौ सौ दस व नौ सौ ग्यारह है।उनका कहना है कि उक्त भूमि पर वर्षों पुराना निजी नलकूप,पेड़-पौधे तथा पानी की व्यवस्था काफी समय पूर्व से स्थापित होने के बाद वर्तमान में भी मौजूद है।मगर उसके बाद भी चकबंदी विभाग के कर्मचारियो अधिकारियो ने उनके खेत के एक हिस्से को “उड़ान चक” बनाकर निमान तराई क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया है।काश्तकारों का आरोप है कि उन्होंने पहले चकबंदी अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी।उसके बाद एस.ओ.सी.चकबंदी अधिकारी मंजूलता से बात कर उन्होंने ने पचास हजार रुपए लिए और दावा है कि इसके बाद उनकी भूमि यथावत रखी गई,लेकिन अब दोबारा नाप-तौल के बाद उनके चक को फिर से उड़ान चक बना दिया गया है। काश्तकारों ने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग काफी समय से ही भ्रष्टाचार में संलिप्त है।पूरे क्षेत्र में चकबंदी विभाग के कर्मचारियो अधिकारियो ने काश्तकारों का शोषण कर रखा है।उन्होने कहा कि चकबंदी विभाग में हर कर्मचारी व अधिकारी बिना रिश्वत के किसी कार्य को करने के लिए कतई तैयार नही होते है।उन्होने कहा कि वर्तमान में चकबंदी विभाग के हल्का कर्मचारी से लेकर उच्च स्तरीय जिम्मेदार अधिकारी बिना रिश्वत लिए कतई किसी भी कार्य को नही कर रहे है।तीनों काश्तकारों ने आरोप लगाते हुए कहा कि चकबंदी की कार्य प्रक्रिया के दौरान रिश्वत के रूप में अनाधिकृत धन नहीं दिए जाने के कारण उनकी भूमि किसी अन्य व्यक्ति को दे दी गई और उनकी जमीन दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दी गई।काश्तकारों ने बताया कि उनकी कुछ भूमि पहले से ही निमान तराई वाले क्षेत्र में है,इसके बावजूद उपजाऊ हिस्से को भी वहीं निमान तराई वाले स्थान पर भेजा जा रहा है।जबकि चकबंदी की कार्य प्रक्रिया के दौरान छोटे टुकड़ों को बड़े हिस्से से जोड़ने का प्रावधान है।काश्तकारों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी भूमि एक स्थान पर नहीं रखी गई तो वे आंदोलन करेंगे।एक किसान ने भावुक होकर कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर होगा। उसने यह भी आरोप लगाया कि चकबंदी विवाद के तनाव के कारण उसके पिता की सदमे में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी।मौके पर मौजूद चकबंदी नायब तहसीलदार विनय राघव एवं क्षेत्रीय लेखपाल अनुभव उपाध्याय से इस संबंध में जानकारी ली गई।उन्होंने बताया कि यदि किसानों को आपत्ति है तो वे उप संचालक चकबंदी (डी.डी.सी.) के समक्ष अपील करें।उनके अनुसार, अपील के बाद आवश्यक कार्रवाई और समस्या का समाधान नियमानुसार किया जाएगा।इस प्रकरण वाले मामले में चकबंदी अधिकारी एस.ओ.सी. मंजूलता ने काश्तकारों के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया।उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान को कोई समस्या है,तो वह सक्षम अधिकारी के समक्ष आपत्ति या वाद प्रस्तुत कर सकता है।रिश्वत लेने के आरोप पर उन्होंने कहा कि वह आरोप लगाने वाले किसान को जानती तक नहीं हैं।उनके अनुसार, लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं तथा एक महिला अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप लगाना अनुचित है।फिलहाल मामला किसानों के आरोपों और विभाग के खंडन के बीच बना हुआ है।अब आगे की कार्रवाई किसानों द्वारा डी.डी.सी.चकबंदी के समक्ष की जाने वाली अपील और विभागीय जांच पर निर्भर करेगी।























