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सासनी 05 जुलाई । क्षेत्र के गांव भोजगढ़ी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के नौवें एवं अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य पंडित मुकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, सुदामा चरित्र, महाराज परीक्षित के मोक्ष तथा कलियुग के लक्षणों का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया। कथा व्यास पंडित मुकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 विवाहों के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि ये विवाह सांसारिक नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए किए गए दिव्य कार्य थे। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की भावपूर्ण कथा सुनाते हुए सच्ची मित्रता, निष्काम प्रेम और अटूट भक्ति का संदेश दिया। इस प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने महाराज परीक्षित और श्री शुकदेव जी के संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने के उपरांत राजा परीक्षित ने तक्षक नाग के दंश से देह त्यागकर मोक्ष प्राप्त किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने जीवन की नश्वरता तथा भगवान के नाम-स्मरण की महिमा का महत्व समझाया। आचार्य ने कलियुग के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में धर्म की अपेक्षा अधर्म की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भगवान का नाम-स्मरण, सत्संग और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, पूर्णाहुति एवं पूजन संपन्न कराया गया। अंत में कथा व्यास ने सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हुए आशीर्वचन प्रदान किए। इस अवसर पर आचार्य लोकेश शर्मा, परीक्षित आनंद शर्मा, शालिनी शर्मा, अरुण शर्मा, माया शर्मा, बबलू शर्मा, कुशमा शर्मा, शशिवाला शर्मा, दिव्यांशी शर्मा, दुर्गा शर्मा, अभिषेक शर्मा, शिव कुमार शर्मा, कौशल शर्मा, मोनी शर्मा, भुवनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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