सादाबाद 27 जून। यूपी में लागू की जा रही ई रजिस्ट्री व्यवस्था का विरोध अब तेज होने लगा है। शनिवार को हाथरस की सादाबाद तहसील में दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और वकीलों ने एकजुट होकर इस नई व्यवस्था के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसील के मुख्य प्रवेश द्वार पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और फिर उप निबंधक कार्यालय के बाहर धरना देकर नई ई-रजिस्ट्री प्रणाली को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। इस प्रदर्शन की वजह से तहसील में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों और दस्तावेज लेखकों का कहना था कि नई ई-रजिस्ट्री या फ्रंट ऑफिस प्रणाली लागू होने से तहसील में उनकी भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत आम लोग घर बैठे या बिना दस्तावेज लेखकों की सहायता के सीधे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने लगेंगे। इससे पीढ़ियों से यह काम कर रहे हजारों परिवारों के सामने अचानक रोजगार और आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। पूर्व प्रांतीय सहायक लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी ने सरकार से अपील की है कि ई-रजिस्ट्री कानून वापस लिया जाए। दस्तावेज लेखकों ने अपनी आजीविका सुरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक नियमावली-1977 में तत्काल संशोधन की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकार को रजिस्टर्ड दस्तावेज लेखकों को नजरअंदाज करने के बजाय, उन्हें नए ई-पंजीकरण पोर्टल पर ‘अधिकृत यूजर’ के रूप में शामिल करना चाहिए। इससे वे नई तकनीक और व्यवस्था के तहत भी आम जनता को अपनी सेवाएं दे सकेंगे और उनका रोजगार भी बचा रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की है कि ई-पोर्टल पर उन्हें लॉग-इन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, नई तकनीक को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार दस्तावेज लेखकों को प्रशिक्षण दे और बायोमेट्रिक उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करे। सरकार यदि नई तकनीक लागू करना चाहती है, तो उससे जुड़े लोगों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ के पूर्व सहायक लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी, अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित, तेज बहादुर सिंह, मन्नू जायसवाल, संजय जायसवाल, शंकर लाल गोला, हजारीलाल सक्सेना, विश्वेंद्र प्रताप सिंह, बहादुर सिंह, विनोद कुमार, संजय कुलश्रेष्ठ, देवेंद्र सिंह और ललित पाराशर सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता एवं अधिवक्ता मौजूद रहे।
























