सादाबाद (सहपऊ) 01 जून । रविवार शाम आए भीषण तूफान और ओलावृष्टि ने सहपऊ क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। तेज हवाओं और ओलों ने किसानों की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया, वहीं बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। क्षेत्र के लगभग 180 गांव अंधेरे में डूब गए हैं और लोगों को पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अवर अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि तूफान के कारण क्षेत्र में 80 से अधिक बिजली पोल टूट गए तथा 25 ट्रांसफार्मर धराशायी होकर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे करीब 180 गांवों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व आई आंधी-बारिश से भी विद्युत विभाग को भारी नुकसान हुआ था और अब एक बार फिर बिजली व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। समाचार लिखे जाने तक विभागीय कर्मचारी युद्धस्तर पर लाइनों को दुरुस्त करने में जुटे हुए थे। रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप है। बिजली न होने से लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, वहीं घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे चुके हैं। तूफान के चलते कई ग्रामीणों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। गांव खोंडा निवासी भागवीर, सिखरा निवासी नरेंद्र देव एवं जितेंद्र तथा थरौरा निवासी अशोक कुमार के टिनशेड तेज हवाओं में उड़ गए। वहीं वासबित्ता निवासी जमुना प्रसाद और नगला रतिया निवासी राकेश की एक-एक भैंस ओलावृष्टि की चपेट में आने से मौत हो गई। नगला सुखराम निवासी शीला देवी पत्नी रामस्वरूप के मकान की छत गिरने से वह मलबे में दबकर घायल हो गईं। उन्हें उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। इसी गांव में दुर्गा प्रसाद, सोवरन सिंह और वीरेंद्र सिंह के मकानों पर पेड़ गिरने से मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। तूफान और ओलावृष्टि का प्रभाव सहपऊ क्षेत्र के लगभग 180 गांवों में देखने को मिला, जहां फसलों, मकानों, पशुधन और विद्युत व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर प्रभावित किसानों एवं नुकसान झेलने वाले परिवारों को राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।]


























