
हाथरस 29 मई । श्री रामबाग इंटर कॉलेज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन महंत श्री मदन मोहन दास जी महाराज ने ऋषभ अवतार, भरत चरित्र एवं भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस का रसपान कराया। महंत श्री मदन मोहन दास जी महाराज ने ऋषभ अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान ऋषभदेव, भगवान श्रीकृष्ण के पूर्ण विस्तार माने जाते हैं। वे आत्मिक आनंद में सदैव लीन रहते थे और अणिमा, महिमा, लघिमा सहित आठों सिद्धियों के स्वामी थे। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन या दुरुपयोग नहीं किया। महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था, तब सुदर्शन चक्र से उनकी उंगली से रक्त निकलने लगा। उस समय द्रौपदी ने अपने वस्त्र का टुकड़ा फाड़कर भगवान की उंगली पर बांध दिया था। उन्होंने कहा कि भक्त प्रभु को थोड़ा भी समर्पित करता है तो भगवान उसे कई गुना लौटाते हैं। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के नाम की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ‘राम’ नाम केवल एक शब्द नहीं बल्कि अखंड शक्ति, शांति और मोक्ष का मार्ग है। कलियुग में राम नाम का स्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी साधन माना गया है। उन्होंने कहा कि राम नाम का जाप मनुष्य के भय, तनाव और चिंता को दूर कर आत्मबल प्रदान करता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी राम नाम को महामंत्र बताया है। राम नाम की शक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र पर पत्थरों पर ‘श्रीराम’ लिखकर ही रामसेतु का निर्माण संभव हुआ था। भागवत कथा समिति के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश बागड़ी ने श्रद्धालुओं को जानकारी देते हुए बताया कि 30 मई को रेवाड़ी से डॉ. अनिल कुमार रामबाग इंटर कॉलेज में प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक योग एवं एरोबिक्स का विशेष अभ्यास कराएंगे। उन्होंने बताया कि इस शिविर में स्लिप डिस्क, कंधे एवं अन्य रोगों के योग द्वारा उपचार संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्तिमय वातावरण में कथा श्रवण किया।
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