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देहरादून 09 मई । अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF) का 28वां त्रिवर्षीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज देहरादून में अत्यंत उत्साह, संघर्षशील संकल्प और ऐतिहासिक निर्णयों के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन देश के विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों, आयुध निर्माणियों, डीआरडीओ, एमईएस, नौसेना, वायुसेना, ईएमई, डीजीक्यूए, डीजीएएफएमएस तथा अन्य रक्षा संस्थानों से आए प्रतिनिधियों ने डायरेक्टरेटवाइज बैठकों में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन के समक्ष रखा। सम्मेलन के दौरान रक्षा नागरिक कर्मचारियों से जुड़े ज्वलंत विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कर्मचारियों के हितों की रक्षा हेतु कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इसी क्रम में “देहरादून डिक्लेरेशन” की घोषणा की गई, जिसे देशभर से पधारे प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से समर्थन प्रदान किया।

देहरादून घोषणा में केंद्र सरकार की उन नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई, जिनके कारण रक्षा नागरिक कर्मचारियों के अधिकारों, रोजगार सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि आयुध निर्माणियों के कॉरपोरेटाइजेशन का निर्णय कर्मचारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के हित में नहीं है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का दर्जा सुनिश्चित किया जाए, जैसा कि सरकार द्वारा न्यायालय में आश्वासन दिया गया था। सम्मेलन में निजीकरण, आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा, फिक्स्ड टर्म रोजगार और रिक्त पदों को समाप्त करने की नीति का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, लेकिन उन्हें भरने के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

प्रतिनिधियों ने नई पेंशन योजना (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विरोध करते हुए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग दोहराई। सम्मेलन में यह भी कहा गया कि श्रम संहिताएं श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने का कार्य कर रही हैं तथा कर्मचारियों के संगठन और आंदोलन के अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मेलन में रक्षा क्षेत्र के विभिन्न विभागों में ट्रेड यूनियन अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि रेलवे जैसे अन्य केंद्रीय संस्थानों में उपलब्ध अधिकार रक्षा कर्मचारियों को नहीं दिए जा रहे हैं, जो कि गंभीर भेदभाव है।

सम्मेलन ने केंद्र सरकार से मांग की कि रक्षा मंत्रालय में जेसीएम व्यवस्था और औद्योगिक संबंध तंत्र को पुनः सक्रिय और मजबूत किया जाए। प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों से जुड़े मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी कर कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है तथा न्यायालयों के निर्णयों को समान रूप से लागू नहीं किया जा रहा। सम्मेलन के अंतिम सत्र में वर्ष 2026 से 2029 के लिए अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हुआ। सदन द्वारा कॉमरेड एस. एन. पाठक को राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा कॉमरेड सी. श्रीकुमार को महासचिव चुना गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों से उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, संगठन सचिव, कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तथा विशेष आमंत्रित सदस्य निर्वाचित किए गए।

देहरादून से संगठन सचिव पद पर अशोक शर्मा, जे. सी. छिमवाल व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पद पर विनय मित्तल का चयन होने पर उत्तराखंड के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों में विशेष उत्साह देखा गया। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने नवनिर्वाचित नेतृत्व को बधाई देते हुए आगामी संघर्षों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। सम्मेलन के समापन अवसर पर महासंघ के नेताओं ने कहा कि रक्षा नागरिक कर्मचारियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है और आने वाले समय में कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष को और तेज किया जाएगा। अंत में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि कर्मचारियों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, पुरानी पेंशन, स्थायी रोजगार और मजबूत सार्वजनिक रक्षा उद्योगों की रक्षा के लिए आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।

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