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सिकंदराराऊ (हसायन) 22 अप्रैल । जयपुर-मथुरा-बरेली-कासगंज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव जैतपुर के दिव्य योग कला मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को भक्ति की बयार बही। कथा व्यास आचार्य श्री श्री 108 कलाधर जी महाराज ने शुकदेव जी के वैराग्य प्रसंग, भगवान श्रीराम जन्म, जानकी विवाह और वनगमन की मार्मिक कथा सुनाई। आचार्य जी ने कहा कि शुकदेव जी ने सांसारिक मोह-माया से बचने के लिए लंबे समय तक जन्म नहीं लिया और जब भगवान ने उन्हें माया से मुक्त रहने का आश्वासन दिया, तभी उन्होंने धरा पर अवतार लिया। प्रभु श्रीराम के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम ने माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन कर समाज को उत्तम जीवन यापन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार श्रीराम ने जनकपुर में शिव धनुष तोड़कर माता सीता का वरण किया और पिता के वचनों को निभाने के लिए सहर्ष 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। वनगमन के दौरान शबरी के जूठे बेर खाकर प्रभु ने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर सामाजिक समरसता का महान उदाहरण पेश किया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। इस धार्मिक अनुष्ठान में नीरज शर्मा, विपिन शर्मा, आरपी शर्मा, राजकुमार शर्मा, सत्यपाल सिंह, पूर्व रिटायर्ड नेत्र परीक्षण अधिकारी सतेन्द्र सिंह, महीपाल सिंह, ऋषि कुमार, रुद्र प्रताप सिंह और मनोज कुमार जादौन सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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