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सादाबाद 06 अप्रैल । क्षेत्र में तीन दिन से हो रही बरसात और रविवार को हुई ओलावृष्टि से जनपद हाथरस के किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। गेहूं, सरसों और आलू सहित अन्य फसलें बड़े पैमाने पर बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक ने केंद्र सरकार से पर्याप्त राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है। यूनियन के पदाधिकारियों ने सोमवार दोपहर तहसीलदार हेमंत चौधरी को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसान यूनियन ने बताया कि वर्तमान मुआवजा मानकों के अनुसार, 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ही किसान पात्र माना जाता है। सिंचित भूमि पर लगभग 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि पर 8500 से 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों पर 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा दिया जाता है। इसके साथ ही, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक ही मुआवजा मिलने की सीमा तय है।किसानों का आरोप है कि यह मुआवजा डीजल, खाद, बीज और मजदूरी की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। कई किसानों की फसलें 2 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रभावित हुई हैं, लेकिन मौजूदा सीमा के कारण उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक दबाव में आकर बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक ने कृषि मंत्री को भेजे ज्ञापन में मुआवजा राशि को वास्तविक लागत के अनुरूप बढ़ाने, 2 हेक्टेयर की अधिकतम सीमा हटाने, केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज जारी करने और फसल बीमा दावों का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी।

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