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हाथरस 23 मार्च । जिले में लागू की गई स्मार्ट मीटर प्रणाली और प्रीपेड व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। भुगतान अपडेट न होने, सर्वर की सुस्ती और लगातार बिजली कटौती ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थिति यह है कि उपभोक्ता जेब से पैसा भरने के बावजूद घंटों और दिनों तक बिजली के लिए तरस रहे हैं, जिससे विभाग की इस ‘स्मार्ट’ योजना पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

रिचार्ज के दो दिन बाद भी नहीं आ रही बिजली

उपभोक्ताओं का आरोप है कि प्रीपेड मोबाइल की तर्ज पर शुरू हुई इस व्यवस्था में पैसा जमा करने के बावजूद राशि सिस्टम में समय पर अपडेट नहीं हो रही है। कई मामलों में भुगतान के दो से तीन दिन बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा रही है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब बैलेंस ‘नेगेटिव’ होते ही बिजली स्वतः कट जाती है और उपभोक्ता को इसकी पूर्व सूचना भी नहीं मिलती।

हेल्पलाइन 1912 बनी ‘शो-पीस’, अधिकारी झाड़ रहे पल्ला

बिजली कटने के बाद जब उपभोक्ता विभागीय अधिकारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें “सिस्टम ऑटोमेटेड है” कहकर टरका दिया जाता है। टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करने पर या तो लाइन बिजी रहती है या कॉल कट जाती है। ग्राहक सेवा प्रतिनिधि से बात न हो पाने के कारण उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी और जागरूकता के इस जटिल सिस्टम को जनता पर थोप दिया गया है।

ऐप और मैसेज के दावों की खुली पोल

विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि ‘यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप’ और मोबाइल मैसेज के जरिए सूचना दी जा रही है, लेकिन हकीकत इससे उलट है। उपभोक्ताओं, विशेषकर बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें न तो समय पर मैसेज मिल रहे हैं और न ही ऐप चलाने की जानकारी दी गई है। उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहे हैं कि नेगेटिव बैलेंस को पॉजिटिव कैसे किया जाए।

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