
हाथरस 11 जून । आगरा रोड स्थित एक गेस्ट हाउस में आज आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं द्वारका-शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का भव्य आगमन हुआ। उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गौभक्त, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य जी ने उपस्थित सैकड़ों लोगों को गौरक्षा एवं गौसंवर्धन की शपथ दिलाते हुए कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना की आधारशिला हैं। उन्होंने गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इस जनजागरण अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

अपने उद्बोधन में शंकराचार्य जी ने बताया कि उनकी राष्ट्रव्यापी गौरक्षा जनजागरण यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का भव्य समापन आगामी 24 जुलाई को लखनऊ में होगा, जहां प्रदेशभर से गौभक्त और सनातन धर्मावलंबी एकत्र होकर गौमाता के सम्मान और संरक्षण का संकल्प दोहराएंगे। शंकराचार्य जी ने अपने संबोधन में हाथरस की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना की वाहक रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक नगर राष्ट्र की आत्मा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हाथरस पहुंचने पर कार्यक्रम संयोजक शरद उपाध्याय नंदा एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता व साहित्यकार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर ब्रज कला केंद्र की उपाध्यक्ष इंदिरा जायसवाल एवं लक्ष्य वार्ष्णेय ने साहित्यकारों की ओर से पीतवस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र पांडेय ने किया, जबकि संपूर्ण आयोजन का निर्देशन अखिलेश ब्रह्मचारी द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन में शरद उपाध्याय नंदा एवं चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य का हाथरस आगमन नगर के लिए गौरव का विषय है और उनके विचार समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण गौरक्षा विषयक काव्य गोष्ठी रही। प्रसिद्ध आशुकवि अनिल बोहरे, कवयित्री मीरा दीक्षित एवं मनु दीक्षित ने गौमाता के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता पर ओजपूर्ण काव्यपाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं शंकराचार्य जी के साथ पधारीं बहन जगदंबा जी ने भी गौरक्षा को राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा से जोड़ते हुए सभी से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं, गौभक्तों और नागरिकों ने गौसंवर्धन एवं गौरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक दायित्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने जगद्गुरु शंकराचार्य के आशीर्वचनों का लाभ प्राप्त किया।


























