मथुरा 25 जून । सफेद दाग (विटिलिगो) के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने तथा इससे जुड़े सामाजिक कलंक को मिटाने के लिए केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चर्मरोग विभाग द्वारा गुरुवार को विश्व विटिलिगो दिवस पर एक संगोष्ठी तथा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं है तथा इसका इलाज सम्भव है।
विश्व विटिलिगो दिवस पर आयोजित संगोष्ठी के शुभारम्भ अवसर पर विभागाध्यक्ष चर्मरोग डॉ. हर्ष शर्मा द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह, मुख्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. अम्बरीश कुमार, उप-महाप्रबंधक मनोज गुप्ता, नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट जोगेन्दर सिंह आदि का स्वागत किया। कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने विटिलिगो से जुड़े भ्रम दूर किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बीमारी छुआछूत से नहीं फैलती। खाना बांटने या साथ बैठने से भी कोई खतरा नहीं है। डॉ. लाहौरी ने कहा कि चूंकि यह रोग शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर मरीज को प्रभावित करता है लिहाजा उसे परिवार और समाज का सहयोग मिलना जरूरी है। डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने बताया कि विटिलिगो एक ऑटोइम्यून त्वचा रोग है। इसमें त्वचा की रंग बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं तथा त्वचा पर सफेद धब्बे बन जाते हैं।
डॉ. अशोका ने बताया कि वर्ल्ड विटिलिगो डे की शुरुआत कई इलाकों में चल रही अलग-अलग जागरूकता मुहिमों से हुई है। भारत में पहली बार डॉ. सविता मल्होत्रा ने 19 मई, 2009 को ‘नेशनल विटिलिगो डे’ शुरू किया था, जोकि 2009 से 2015 तक मनाया गया। बाद में प्रो. दविंदर प्रसाद ने तीन राष्ट्रीय डर्मेटोलॉजिकल सोसायटियों को एक साथ लाकर वर्ल्ड विटिलिगो डे को मंज़ूरी दिलाई। प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि त्वचा विकार ने मेडिकल एडवोकेसी को एक ऐसा मॉडल दिया है जो समाज में बदलाव का संकेत देता है। उन्होंने लोगों को विटिलिगो के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की सलाह दी। उप-महाप्रबंधक मनोज गुप्ता ने केडी हॉस्पिटल में सफेद दाग से निजात पाने वाले एक रोगी पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अब सफेद दाग लाइलाज नहीं है, इसको लेकर अब समाज की सोच बदल रही है, जोकि अच्छा संकेत है। इस अवसर पर एक सफेद दाग पीड़ित ने भी अपना अनुभव साझा किया। डॉ. एस.के. बंसल, डॉ. निमिषा सक्सेना, डॉ. सौरभ कुलकर्णी, डॉ. शिवांगी अग्रवाल, डॉ. मनीषा गुप्ता, डॉ. जयेश, डॉ. नाजिया आदि ने छात्र-छात्राओं के नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रजेंटेशन की सराहना की। विभागाध्यक्ष डॉ. हर्ष शर्मा ने बताया कि इस संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य इस बीमारी से जुड़े भ्रम के बारे में जागरूकता फैलाना और उससे लड़ना है। अंत में डॉ. शर्मा ने संगोष्ठी में शामिल चिकित्सा विशेषज्ञों का आभार माना तथा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं की प्रशंसा की। सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं, इसका इलाज सम्भव, विश्व विटिलिगो दिवस पर केडी हॉस्पिटल में हुई संगोष्ठी मेडिकल छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किए जागरूकता कार्यक्रम

























