
हाथरस 05 सितम्बर। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लेबर कॉलोनी में शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु की महिमा, शिक्षा के महत्व, प्रकृति संरक्षण, पाश्चात्य संस्कृति एवं आधुनिक शिक्षा के अंतर तथा समाज में व्याप्त विभिन्न सामाजिक विकृतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य राजेश शर्मा ने किया, जबकि अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक श्री मनोज अग्निहोत्री ने की। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः…” जैसे पवित्र श्लोक से करते हुए गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। तुलसीदास जी द्वारा गुरु की महिमा के वर्णन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि चाहे तो किसी भी विषय की दशा और दिशा बदल सकता है। शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मार्गदर्शक भी है। मनोज अग्निहोत्री ने जीवन के मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा, “When wealth is lost, nothing is lost; when health is lost, something is lost; when character is lost, all is lost.” उन्होंने कहा कि धन और स्वास्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र है, क्योंकि चरित्र ही उसके जीवन की वास्तविक पहचान होता है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के प्रयासों से विद्यार्थी का भविष्य ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा भी प्रभावित होती है।
कार्यक्रम में डॉ. रोहिताश पाराशर ने प्रकृति के स्वभाव और मनुष्य के साथ उसके संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। डॉ. श्रीमती अनुपम भारद्वाज ने पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के अंतर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा एवं तकनीक को अपनाने के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना भी आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि संस्कारवान, जिम्मेदार और चरित्रवान नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। पाण्डेय जी ने अभिभावकों की शिक्षा के प्रति अनभिज्ञता तथा समाज में फैल रही विभिन्न सामाजिक विकृतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय और परिवार, दोनों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है। बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ उचित संस्कार और सकारात्मक वातावरण मिलना भी जरूरी है। कार्यक्रम की समस्त व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी विद्यालय के प्रमुख एवं उप प्रधानाचार्य श्री सतीश सरस्वत ने संभाली। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संपन्न हुईं। शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा के उद्देश्य, संस्कार एवं चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने की क्षमता रखने वाला सशक्त माध्यम है।









