सादाबाद 07 सितम्बर। कला जगत में अर्जित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति और चित्रकला के क्षेत्र में निरंतर किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए चित्रकार एवं शिक्षाविद डॉ. भेद प्रकाश सिंह ‘चित्रकार हाथरसी’ को ‘डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। शिक्षक दिवस के अवसर पर ऑनलाइन आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित किया गया। यह सम्मान शांति फाउंडेशन गोंडा, उत्तर प्रदेश एवं इनोवेटिव टीचर्स ग्रुप ऑफ इंडिया द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में पद्मश्री डॉ. विजय कुमार शाह की वर्चुअल उपस्थिति रही। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में डॉ. भेद प्रकाश सिंह को सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक सुनील कुमार आनंद (राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) ने डॉ. सिंह के कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर हाथरस के जिलाधिकारी अतुल वत्स, मुख्य विकास अधिकारी हाथरस, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान तथा सादाबाद के विधायक प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू चौधरी आदि ने भी चित्रकार हाथरसी की पेंटिंग्स की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वहीं, हाथरस आगमन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चित्रकार हाथरसी उर्फ डॉ. भेद प्रकाश सिंह की कला की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया था।
विकसित हाथरस’ पेंटिंग में विकास की समग्र परिकल्पना
डॉ. भेद प्रकाश सिंह की चर्चित कलाकृति ‘विकसित हाथरस’ उनकी कला-दृष्टि और सामाजिक सरोकारों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। मिक्स मीडिया माध्यम में निर्मित यह विचारप्रधान पेंटिंग हाथरस के विकास को आधुनिक तकनीक, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और मानवीय संवेदनाओं के समन्वय के रूप में प्रस्तुत करती है। यह कलाकृति केवल भौतिक प्रगति का चित्रण नहीं करती, बल्कि यह संदेश देती है कि वास्तविक विकास वही है, जिसमें प्रकृति, तकनीक और मनुष्य के बीच संतुलन बना रहे। कलाकृति के ऊपरी भाग में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्रण दिखाई देता है, जो प्रदेश के नेतृत्व और विकास की दिशा का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ उत्तर प्रदेश की पहचान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े दृश्यात्मक तत्व रचना को स्थानीय और व्यापक संदर्भ प्रदान करते हैं।
चित्र के मध्य भाग में हाथरस की पहचान से जुड़े स्थापत्य तत्वों का समावेश किया गया है। यह स्थानीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और नगर की विशिष्ट पहचान को आधुनिक विकास की अवधारणा से जोड़ता है। इस प्रकार रचना यह संदेश देती है कि विकास केवल नई संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी है। कलाकृति के मध्य में स्थापित न्याय का तराजू सामाजिक संतुलन, समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था का प्रतीक है। इसके दोनों पलड़ों में प्रकृति और आधुनिक तकनीक से जुड़े दृश्य दिखाई देते हैं। एक पलड़े में वृक्ष पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि दूसरे पलड़े में रोबोट आधुनिक विज्ञान, तकनीकी नवाचार और भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक है। दोनों के बीच संतुलन यह संदेश देता है कि तकनीकी प्रगति प्रकृति के संरक्षण के साथ आगे बढ़नी चाहिए। चित्र के निचले मध्य भाग में खुली पुस्तक तथा उससे विकसित होती हुई पौधे की आकृति शिक्षा, ज्ञान, रचनात्मकता और विकास के परस्पर संबंध को अभिव्यक्त करती है। खुली पुस्तक ज्ञान के द्वार का प्रतीक है, जबकि उससे उभरता हुआ पौधा यह संकेत देता है कि शिक्षा के माध्यम से विचारों, प्रतिभाओं और संभावनाओं का विकास होता है। पौधे की हरियाली जीवन, आशा और भविष्य की उन्नति का प्रतीक है। चित्र में रोबोटिक आकृतियों तथा यांत्रिक हाथों का समावेश आधुनिक तकनीकी युग की संभावनाओं को दर्शाता है। ये तत्व विज्ञान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी दक्षता की ओर संकेत करते हैं। वहीं, ऊपर की ओर बढ़ता हुआ तीर प्रगति, उन्नति और सकारात्मक परिवर्तन का स्पष्ट प्रतीक है। यहu हाथरस के उज्ज्वल भविष्य को लेकर कलाकार की आशावादी दृष्टि को अभिव्यक्त करता है। कलाकृति में प्रयुक्त नीले, पीले, नारंगी, हरे और भूरे रंगों का संयोजन इसे विशिष्ट दृश्यात्मक प्रभाव प्रदान करता है। नीला रंग शांति और व्यापक संभावनाओं का संकेत देता है। पीला एवं नारंगी रंग ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता का भाव उत्पन्न करते हैं। हरा रंग प्रकृति, जीवन और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, जबकि भूरे रंग स्थापत्य, धरती और स्थानीय पहचान से जुड़े तत्वों को उभारते हैं। मिक्स मीडिया माध्यम में विभिन्न दृश्यात्मक तत्वों, आकृतियों और तकनीकों का संयोजन इस रचना को बहुस्तरीय बनाता है। तकनीकी आकृतियों, स्थापत्य संरचनाओं, प्राकृतिक प्रतीकों और मानवीय रूपों का समावेश इसे एक समकालीन एवं विचारप्रधान कलाकृति का स्वरूप देता है। यह रचना कलाकार की उस सोच को अभिव्यक्त करती है, जिसमें कला केवल सौंदर्यबोध का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और भविष्य की दिशा पर विचार करने का सशक्त साधन भी है।
कला-साधना और युवा पीढ़ी पर प्रभाव
डॉ. भेद प्रकाश सिंह की कला-साधना का प्रभाव क्षेत्र के युवा कलाकारों और विद्यार्थियों पर भी दिखाई दे रहा है। उनकी कला से प्रेरित होकर क्षेत्र के अनेक बच्चे बीएफए (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) में प्रवेश लेकर चित्रकला के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह उनके कला-कार्य की प्रेरणादायी भूमिका को दर्शाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. सिंह का योगदान उल्लेखनीय है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति एवं कला के प्रति रुचि विकसित करने में वे निरंतर प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि कला केवल सौंदर्यबोध का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त साधन भी है।
आर्ट गैलरी एवं संग्रहालय की स्थापना की पहल
इसके अतिरिक्त, सादाबाद के विधायक प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू चौधरी ने भी डॉ. सिंह की कला को सम्मान देते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा की है। उनकी कला से प्रभावित होकर आर्ट गैलरी एवं आर्ट संग्रहालय की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाने की पहल भी की गई है, जो क्षेत्र में कला के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सम्मान प्राप्त होने पर डॉ. भेद प्रकाश सिंह ने शांति फाउंडेशन गोंडा एवं इनोवेटिव टीचर्स ग्रुप ऑफ इंडिया के प्रति हार्दिक आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पद्मश्री डॉ. विजय कुमार शाह की वर्चुअल उपस्थिति में प्राप्त यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव एवं प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी कला-सृजन, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन तथा क्षेत्र में कला के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। इस अवसर पर एस.बी.जे. इंटर कॉलेज के प्रबंधक चौधरी रामेश्वर सिंह, प्रधानाचार्य हेमंत कुमार, प्रवक्ता रामचरण सिंह, शिक्षक योगवीर सिंह आदि कॉलेज के समस्त स्टाफ ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।








