‘राष्ट्र के निर्माण में हिंदी की भूमिका’ विषय पर विद्यार्थियों ने रखे विचार, विजेताओं को मिला सम्मान
हाथरस 14 सितम्बर। पीसी बागला महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. संदीप बंसल, प्रो. पीके शर्मा, प्रो. सुनंदा महाजन, प्रो. चंद्रशेखर रावल, प्रो. राजेश कुमार (हिंदी) एवं प्रो. केएन त्रिपाठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत एमए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं मेघा शर्मा, शालू सिंह एवं खुशी कौशिक द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा एवं साहित्यिक वैभव को रेखांकित करते हुए कबीर, रहीम, बिहारी एवं भारतेंदु हरिश्चंद्र की रचनाओं का प्रभावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया। शालू सिंह, दीप्ति उपाध्याय, मेघा शर्मा, खुशी कौशिक एवं साक्षी की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हिंदी दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्र के निर्माण में हिंदी की भूमिका’ विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में 25 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने हिंदी की भूमिका, उपयोगिता और समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने हिंदी को महज संप्रेषण की भाषा न बताते हुए राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक संवाद और ज्ञान-विस्तार की महत्वपूर्ण भाषा के रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. के.एन. त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी की भूमिका निरंतर सक्रिय और महत्वपूर्ण हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के स्थान पर अनावश्यक रूप से ‘हिंग्लिश’ के प्रयोग से बचने और हिंदी लेखन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि “हिंदी किसी भाषा की चेरी नहीं है। उसका अपना समृद्ध व्याकरण है।” उन्होंने हिंदी की स्वतंत्र भाषिक पहचान, समृद्ध साहित्यिक परंपरा एवं सामर्थ्य पर प्रकाश डाला। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनंदा महाजन ने कहा कि हिंदी की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। डिजिटल युग में हिंदी के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो. सुनंदा महाजन के काव्य संग्रह ‘मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै’ का विमोचन भी किया गया। इसके अतिरिक्त डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह, डॉ. प्रेमकिशोर एवं डॉ. बृजेश सिंह कुशवाहा ने हिंदी की वर्तमान स्थिति, उपयोगिता तथा राष्ट्र-निर्माण में हिंदी की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। भाषण प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका प्रो. एम.पी. सिंह, डॉ. पप्पू चौधरी एवं डॉ. विनीत सिंह ने निभाई। प्रतियोगिता में पलक स्वामी ने प्रथम, अंजलि पौनिया ने द्वितीय तथा खुशी कौशिक एवं पूजा सारस्वत ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के प्रति विद्यार्थियों में उत्साह और गौरव का भाव देखने को मिला। वक्ताओं ने हिंदी को आधुनिक दौर की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए इसके व्यापक प्रयोग और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।










