सिकन्दराराऊ (हसायन) 22 जून । नगर पंचायत कार्यालय में कार्यरत तैनात पंप आपरेटर से क्लर्क बने कर्मचारी की नियुक्ति,नियुक्ति आदेश,चयन प्रक्रिया,सेवा अभिलेख,वेतन भुगतान संबंधी विवरण तथा गजट को लेकर कस्बा के मोहल्ला अहीरान के रहने वाले सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के अधिवक्ता एवं आर.टी.आई.कार्यकर्ता पुष्पेन्द्र वीर प्रताप के द्वारा डेढ वर्ष पूर्व दिनांक सत्रह दिसंबर 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक आरटीआई आवेदन दायर किया गया था।आवेदन में नगर पंचायत हसायन कार्यरत बाबूलाल क्लर्क की नियुक्ति,नियुक्ति आदेश,चयन प्रक्रिया,सेवा अभिलेख,वेतन भुगतान संबंधी विवरण तथा गजट अधिसूचना से संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी गई थी।निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर आवेदक ने मामला उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि आरटीआई आवेदन दायर होने के काफी समय बाद भी आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सूचना आयोग ने सचिव, नगर निकाय अनुभाग,नगर विकास विभाग, लखनऊ तथा संबंधित जनसूचना अधिकारी से जवाब तलब किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि आवेदक को वांछित सूचना उपलब्ध कराई जाए तथा सूचना देने में हुई देरी के संबंध में स्पष्ट स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।उल्लेखनीय है कि यह आरटीआई आवेदन डेढ वर्ष पहले सत्रह दिसंबर 2024 को दायर किया गया था,लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।आयोग ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया है।राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि चौबीस जून 2026 को निर्धारित अगली सुनवाई तक आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती तथा संबंधित जनसूचना अधिकारी संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहते हैं,तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत संबंधित जनसूचना अधिकारी पर ढाई सौ रूपए प्रतिदिन की दर से आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।आरटीआई आवेदन में नगर पंचायत हसायन में कार्यरत बाबूलाल क्लर्क की नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता,नियुक्ति की वैधता तथा संबंधित प्रशासनिक अभिलेखों की जानकारी मांगी गई थी।मामले के राज्य सूचना आयोग तक पहुंचने के बाद यह प्रकरण स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।