हाथरस 12 सितम्बर। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में स्थानीय एवं ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण की स्थिति के अध्ययन को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया एवं एसपी सिंह तथा विशेष कार्याधिकारी असलम अंसारी मौजूद रहे। मुख्य विकास अधिकारी ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
बैठक को संबोधित करते हुए आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में आयोग प्रदेश के विभिन्न जनपदों का भ्रमण कर अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रहा है। स्थानीय एवं ग्रामीण निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा आरक्षण से जुड़े तथ्यों का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से प्राप्त सुझावों, आपत्तियों और प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर आयोग अपनी संस्तुतियां सरकार को उपलब्ध कराएगा।
बैठक के दौरान आयोग ने निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक श्रीमती सीमा उपाध्याय सहित विभिन्न विकास खंडों से आए ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय के पिछड़ेपन के कारणों तथा स्थानीय निकायों में उनके प्रतिनिधित्व, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने, पिछड़ा वर्ग को संख्या के आनुपातिक आधार पर आरक्षण देने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मुख्य विकास अधिकारी ने आयोग को जनपद के भौगोलिक एवं प्रशासनिक विवरण की जानकारी देते हुए बताया कि हाथरस का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1,800 वर्ग किलोमीटर तथा ग्रामीण जनसंख्या 11,95,441 है। जनपद में चार तहसील, सात विकास खंड, दो नगर पालिका परिषद, सात नगर पंचायत, 462 ग्राम पंचायत एवं 658 राजस्व ग्राम हैं। जनपद में एक लोकसभा और तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। गेहूं, धान, आलू, सरसों, मक्का, बाजरा एवं ज्वार यहां की प्रमुख फसलें हैं। हींग, गुलाल, मूंगा एवं मोती से संबंधित कार्य प्रमुख उद्योगों में शामिल हैं। एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत हींग को जनपद के विशिष्ट उत्पाद के रूप में चयनित किया गया है।
बैठक में जिला पंचायत स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व से संबंधित आंकड़े और जानकारी भी आयोग के समक्ष रखी गई। जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व, आरक्षण तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न सुझाव आयोग को दिए।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का आकलन प्रमाणिक तथ्यों, आंकड़ों एवं जनसहभागिता के आधार पर किया जाना जरूरी है। जनपद भ्रमण के दौरान प्राप्त सभी सूचनाओं और सुझावों का संकलन कर उनका अध्ययन किया जाएगा तथा विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की।
बैठक में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक, जिला पंचायत के संबंधित सदस्य, निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख/प्रशासक, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक के अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण के जनपद आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए।
इस दौरान जिला विकास अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, सहायक खंड विकास अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।









