
हाथरस 03 अक्टूबर। सड़क दुर्घटना, आत्महत्या के प्रयास समेत गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए उपचार के शुरुआती चंद मिनट बेहद अहम माने जाते हैं। शनिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे आत्महत्या के प्रयास के एक गंभीर मरीज के मामले में इसी प्राथमिकता को लेकर सवाल खड़े हुए। आरोप है कि मरीज के इमरजेंसी में पहुंचने के बाद चिकित्सक उसके उपचार की बजाय मंडलायुक्त की आगवानी में व्यस्त हो गए। करीब 15 मिनट तक मरीज को उपचार का इंतजार करना पड़ा। हालांकि बाद में चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया और मरीज की जान बच गई। इमरजेंसी में हुई इस स्थिति को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने के बाद मंडलायुक्त अलीगढ़ मंडल ओपी आर्य ने स्पष्ट कहा कि किसी भी मरीज का उपचार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों का उपचार चिकित्सक ही करेंगे।
ओपी आर्य, मंडलायुक्त अलीगढ़ मंडल ने कहा—
“किसी भी मरीज का उपचार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं करेंगे। मरीजों का उपचार चिकित्सक ही करेंगे।” मंडलायुक्त के इस निर्देश के बाद गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान चिकित्सकों की मौजूदगी और इमरजेंसी सेवाओं की प्राथमिकता को लेकर अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।




