
हाथरस 03 अक्टूबर। जिला अस्पताल में शनिवार को इमरजेंसी सेवाओं की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में गंभीर हालत में पहुंचे गला कटे मरीज का उपचार शुरू होने से पहले ही चिकित्सक कमिश्नर की आगवानी में जुट गए। इस दौरान करीब 15 मिनट तक मरीज उपचार के लिए इंतजार करता रहा और उसकी देखभाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं इंटर्न के भरोसे रही। गंभीर रूप से घायल मरीज के लिए शुरुआती समय महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में घटना ने अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। बताया गया कि कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी 36 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर नशे की हालत में धारदार हथियार से अपना गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन घबरा गए और आनन-फानन में घायल युवक को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे।
परिजनों के मुताबिक इमरजेंसी में चिकित्सक मरीज का उपचार शुरू करने की तैयारी में थे, तभी मंडलायुक्त के इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण के लिए पहुंचने की सूचना हुई। आरोप है कि इसके बाद चिकित्सक घायल मरीज को उपचार के लिए इंतजार करता छोड़ कमिश्नर की आगवानी में लग गए। बताया गया कि मंडलायुक्त करीब 15 मिनट तक इमरजेंसी वार्ड में रहे। इस दौरान गला कटे मरीज की देखभाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और इंटर्न करते रहे। गंभीर रूप से घायल मरीज उपचार के लिए चिकित्सकों का इंतजार करता रहा। मंडलायुक्त के निरीक्षण से निकलने के बाद चिकित्सकों ने मरीज का उपचार दोबारा संभाला। घटना के बाद अस्पताल की इमरजेंसी में वीआईपी निरीक्षण और गंभीर मरीज के उपचार के बीच प्राथमिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन या संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने आना बाकी है। मरीज की हालत और घटना के संबंध में चिकित्सकीय स्थिति की जानकारी भी अस्पताल प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।





