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हाथरस 15 मई । संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने साइबर अपराध के झूठे एवं फर्जी मामलों में फंसे निर्दोष नागरिकों, छात्रों, व्यापारियों और उद्योगपतियों की वित्तीय देनदारी समाप्त कर राहत प्रदान किए जाने की मांग को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कहा कि प्रदेश के लाखों व्यापारी, उद्योगपति और एमएसएमई इकाइयां तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों तथा उनसे जुड़े कानूनी और वित्तीय संकटों से प्रभावित हो रहे हैं।

ज्ञापन में बताया गया कि पिछले तीन वर्षों में यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में वृद्धि के साथ साइबर ठगी के मामलों में लगभग 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। संगठन के अनुसार, अनेक मामलों में असली अपराधियों के साथ-साथ कम पढ़े-लिखे युवा, छात्र, व्यापारी और उद्योगपति भी अनजाने में ‘म्यूल अकाउंट’, केवाईसी फ्रॉड, जॉब एवं लोन फ्रॉड तथा ऑटो डेबिट धोखाधड़ी के माध्यम से कानूनी जाल में फंस जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप बैंक खाते फ्रीज हो जाते हैं, व्यापार प्रभावित होता है और निर्दोष लोगों को भारी कानूनी खर्च उठाना पड़ता है। व्यापार मंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं और साइबर धोखाधड़ी के कारण खाता फ्रीज होने से सप्लाई चेन बाधित होती है, मजदूरों का वेतन रुकता है तथा कर संबंधी दायित्व प्रभावित होते हैं। संगठन ने केंद्र सरकार, Reserve Bank of India तथा उत्तर प्रदेश सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं, जिनमें निर्दोष खाताधारकों के लिए वित्तीय देनदारी समाप्त करने हेतु विशेष कानून, पहली बार अनजाने में फंसे युवाओं के लिए एमनेस्टी योजना, विवादित राशि तक ही खाते पर रोक, बचत खातों पर साइबर बीमा, हेल्पलाइन 1930 को और प्रभावी बनाना, प्रत्येक जिले में साइबर सहायता केंद्र की स्थापना तथा साइबर मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था शामिल है। ज्ञापन में कहा गया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार होगा, जब आम नागरिक डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित महसूस करेंगे। वर्तमान में कई मामलों में निर्दोष व्यक्ति परेशान हो रहे हैं, जबकि वास्तविक अपराधी बच निकलते हैं। संगठन ने सरकार से मांग की कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाए जाएं। ज्ञापन देने वालों में राजीव वार्ष्णेय (संस्थापक), राकेश बल्लभ वशिष्ठ (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मुख्य संरक्षक), कन्हैया वार्ष्णेय (संस्थापक), राजेन्द्र वार्ष्णेय (जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष) तथा कृष्णा शर्मा पहलवान (युवा नगर अध्यक्ष) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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