
हाथरस 03 सितम्बर। जनपद के विकासखंड मुरसान क्षेत्र स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय मथु तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (एडीएचआर) की टीम ने गुरुवार को विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय के नेतृत्व में पहुंची टीम ने मौके पर पहुंचकर विद्यालय तक जाने वाले रास्ते की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण में मुख्य मार्ग पर कीचड़, दलदल और जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई। हालांकि विद्यालय का अंदरूनी परिसर व्यवस्थित और ठीक स्थिति में पाया गया। विद्यालय तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग जलभराव और कीचड़ से इस कदर प्रभावित है कि छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक एवं विद्यालय स्टाफ को भी सुरक्षित आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टीम के अनुसार कई बार बच्चे और शिक्षक मुख्य रास्ते के बजाय बराबर स्थित प्लॉटों के रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों ने एडीएचआर टीम को बताया कि पानी की निकासी के लिए पूर्व में उपलब्ध रास्ते को आगे की ओर अवरुद्ध कर दिए जाने के कारण जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है। उचित जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यालय के मुख्य मार्ग की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है।
बच्चों को सुरक्षित स्कूल मार्ग मिलना जरूरी : प्रवीन वार्ष्णेय
एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि देश को आजाद हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं और संविधान लागू हुए भी 76 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद यदि बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए कीचड़ और दलदल से होकर गुजरना पड़े तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों का सुरक्षित रूप से स्कूल तक पहुंचना भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एडीएचआर जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने कहा कि शिक्षा पुस्तकों और विद्यालय भवन तक सीमित नहीं है। जब बच्चे सुरक्षित रूप से विद्यालय तक पहुंच ही नहीं पाएंगे तो शिक्षा के अधिकार की वास्तविक भावना अधूरी रह जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव की राजनीति और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सबसे पहले बच्चों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि किसी भी गांव का भविष्य उसके बच्चों से जुड़ा होता है और बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा के साथ किसी प्रकार की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रशासन से मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए स्थायी समाधान कराने की मांग की।
एसडीएम सदर से मिलकर बताई समस्या
विद्यालय के निरीक्षण के बाद एडीएचआर की टीम ने एसडीएम सदर राज बहादुर से मुलाकात कर उन्हें विद्यालय तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति से अवगत कराया। टीम ने कहा कि समस्या का स्थायी समाधान केवल अस्थायी रूप से मिट्टी डालने या सफाई कराने से नहीं होगा। एडीएचआर ने मांग की कि एसडीएम सदर के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम द्वारा संबंधित चकरोड की विधिवत पैमाइश कराई जाए। इसके बाद विकासखंड स्तर से आवश्यक कार्रवाई करते हुए मार्ग को सुचारु कराया जाए तथा जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाली अथवा पानी की निकासी की उचित व्यवस्था विकसित की जाए। राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि जब तक राजस्व विभाग द्वारा चकरोड की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए उसकी नाप-तौल नहीं कराई जाती और प्रशासनिक स्तर पर पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
खंड विकास कार्यालय मुरसान भी पहुंची टीम
इसके बाद एडीएचआर की टीम विकासखंड मुरसान कार्यालय पहुंची और संबंधित अधिकारियों से भी विद्यालय की समस्या को लेकर वार्ता की। टीम ने अधिकारियों के समक्ष बच्चों एवं शिक्षकों को हो रही परेशानियों को विस्तार से रखा। टीम के अनुसार खंड विकास अधिकारी मुरसान की ओर से भी एसडीएम सदर को चकरोड की पैमाइश कराए जाने के संबंध में पत्र लिखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि विद्यालय तक पहुंचने वाले मार्ग की समस्या के समाधान के लिए राजस्व एवं विकास विभाग के स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार को अभियान चला रहा एडीएचआर
राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि एडीएचआर जनपद में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए अभियान के रूप में कार्य कर रहा है। संगठन का उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि संबंधित विभागों एवं प्रशासन के सहयोग से उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण, बेहतर भवन, शुद्ध पेयजल, शौचालय, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालय मथु सहित जनपद के सरकारी विद्यालयों में बच्चों से जुड़ी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए एडीएचआर लगातार प्रयास करता रहेगा। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा। एडीएचआर ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष अथवा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा मामला है। संगठन की मांग है कि प्रशासन तत्काल स्थलीय जांच, चकरोड की पैमाइश और पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि नौनिहालों को कीचड़ और दलदल से होकर विद्यालय जाने की मजबूरी से निजात मिल सके। एडीएचआर का स्पष्ट संदेश है—“बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। स्कूल तक सुरक्षित रास्ता प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।” स्थलीय निरीक्षण के दौरान रवि गुप्ता, बाल प्रकाश वार्ष्णेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।













