
हाथरस 17 अक्टूबर । जिले में फर्जी नर्सिंग कॉलेज के नाम पर छात्रों से लाखों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। हसायन रोड स्थित निजामतपुर के उड़ान ग्रुप ऑफ एजुकेशन और लौंग श्री देवी लाल कॉलेज, नगला आल पर फर्जी कोर्स संचालित करने, कूटरचित अंकतालिकाएं देने और विरोध करने पर मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। छत्तरपुर निवासी ज्योति पत्नी सुशील कुमार ने एसीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया, जिसके आधार पर मामले में अभियोग पंजीकृत कराया गया है।
परिवाद के अनुसार, वर्ष 2021 में उज्ज्वल सेंगर पुत्र मानपाल, मानपाल सिंह पुत्र रूकमपाल सिंह निवासी निजामतपुर और रितेश कुमार पुत्र चंद्रशेखर निवासी मान महौ पीड़िता के घर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि हसायन रोड पर उड़ान ग्रुप ऑफ एजुकेशन कॉलेज खोला गया है, जहां एएनएम और डी-फार्मा के कोर्स उपलब्ध हैं और योजना के तहत प्रवेश दिलाया जा सकता है। आरोप है कि उज्ज्वल सेंगर ने खुद को कॉलेज का प्राचार्य और रितेश कुमार ने वाइस प्रिंसिपल बताया। उनकी बातों पर विश्वास कर पीड़िता ने प्रवेश ले लिया।
पीड़िता का आरोप है कि कॉलेज में प्रवेश संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद हर साल फर्जी परीक्षाएं कराई गईं। इन परीक्षाओं में उसके साथ भानू प्रताप, विमल, रामजीत, जितेंद्र, दीपक कोहली समेत 10 से 20 छात्रों को बैठाया जाता था। परिणाम मांगने पर कथित तौर पर फर्जी वेबसाइट तैयार कर रिजल्ट कार्ड और मार्कशीट उपलब्ध कराई गई। पीड़िता को जीएनएम का रोल नंबर भी दिया गया। बाद में जब वह एक निजी अस्पताल में नौकरी के लिए पहुंची और दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच कराई गई, तो उसके रजिस्ट्रेशन और अंकतालिका फर्जी बताए गए।
परिवाद में 14 अगस्त की घटना का भी उल्लेख किया गया है। ज्योति के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे वह शिकायत करने कॉलेज पहुंची तो चौकीदार रामप्रकाश ने उसे शाम को आने के लिए कहा। आरोप है कि शाम को भानू प्रताप, पूनम और सुशील के साथ दोबारा पहुंचने पर वहां मानपाल, स्वर्णलता पत्नी मानपाल, प्रेमचंद सिंह, रामप्रकाश और दो-तीन अन्य लोग मौजूद थे। फर्जीवाड़े को लेकर बात करने पर कथित तौर पर आरोपितों ने लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और सरियों से हमला कर दिया, जिसमें सुशील और राधे गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़िता ने जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है।
ज्योति का दावा है कि प्रत्येक छात्र से एक से डेढ़ लाख रुपये तक फीस वसूली गई। उसका कहना है कि थाने में शिकायत के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजी गई, लेकिन कार्रवाई न होने पर उसने न्यायालय की शरण ली। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।









