
हाथरस 05 सितम्बर। हाथरस में संरक्षित पशु के मांस की तस्करी के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और गौ रक्षकों का पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शनिवार को बड़ी संख्या में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर गौ रक्षकों के साथ अभद्रता और लाठीचार्ज करने का आरोप लगाते हुए थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना को हटाने की मांग की। कोतवाली हाथरस गेट के प्रभारी के रूप में नितिन कसाना की तैनाती की पुष्टि उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर भी है। विवाद की शुरुआत उस घटना के बाद हुई, जिसमें गौ रक्षकों ने एक कंटेनर में संरक्षित पशु का मांस ले जाए जाने की सूचना पर उसे रोक लिया था। विहिप पदाधिकारियों का आरोप है कि कंटेनर की जांच कराने की मांग को लेकर मौके पर पहुंचे गौ रक्षकों के साथ पुलिस ने अभद्रता की और लाठियां चलाकर उन्हें वहां से खदेड़ दिया। विहिप जिला मंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने इस संबंध में वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया था और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर धरने का ऐलान किया था। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कंटेनर की जांच की गई थी और आवश्यक कागजात पाए जाने के बाद उसे जाने दिया गया। पुलिस ने लाठीचार्ज और अभद्रता के आरोपों को गलत बताया है।
इसी मामले को लेकर विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारियों की थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना से तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बातचीत के दौरान थाना प्रभारी ने हिंदूवादी नेताओं को कथित तौर पर ‘दलाल’ कहा और उन पर चौथ लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई कि वे घर नहीं जा पाएंगे। इन आरोपों को लेकर प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। बातचीत से जुड़ा वीडियो सामने आने का दावा भी किया जा रहा है, जिसे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के समक्ष सबूत के तौर पर रख रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले से आक्रोशित विहिप, बजरंग दल और गौ रक्षक बड़ी संख्या में एसपी कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती, उनका धरना जारी रहेगा। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाने की चेतावनी भी दी गई है। धरने के दौरान पुलिस-प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत और स्थिति को नियंत्रित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल पूरा मामला पुलिस और हिंदूवादी संगठनों के बीच बढ़ते विवाद का रूप ले चुका है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस-प्रशासन प्रदर्शनकारियों के आरोपों की जांच को लेकर क्या कदम उठाता है और थाना प्रभारी को हटाने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।









