
हाथरस 14 अक्टूबर। यदि आपके या आपके किसी परिजन के जन्म अथवा मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक पुराना है और अभी तक प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है, तो अब इसे बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 तथा संशोधित केंद्रीय प्रावधानों के तहत नई व्यवस्था एक अक्टूबर से लागू कर दी गई है। नए नियमों के अनुसार, दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में केवल एसडीएम का आदेश पर्याप्त नहीं होगा। वहीं, एक से दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों में अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से पंजीकरण कराया जा सकेगा। इससे पहले 30 सितंबर तक लागू व्यवस्था में एक वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए एसडीएम के यहां आवेदन करना पड़ता था। एसडीएम स्तर पर जांच-पड़ताल के बाद अनुमति दी जाती थी और इसके आधार पर नगर पालिका या संबंधित निकाय प्रमाणपत्र जारी करता था। नई व्यवस्था में दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों के लिए न्यायिक प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई है। हालांकि, अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं में बदलाव नहीं किया गया है। नगर पालिका परिषद हाथरस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से सितंबर 2026 तक जन्म पंजीकरण के लिए कुल 1,352 सूचनाएं प्राप्त हुईं। इनमें जांच के बाद 1,227 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इसी अवधि में मृत्यु पंजीकरण की 143 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 92 मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए।
जानिए जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए निर्धारित शुल्क और समय-सीमा
नियमों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर देने पर सामान्य पंजीकरण निशुल्क किया जाता है। 21 दिन से अधिक और 30 दिन तक की देरी पर 20 रुपये शुल्क निर्धारित है। 30 दिन से अधिक और एक वर्ष तक की देरी पर सक्षम अधिकारी की अनुमति के साथ 50 रुपये शुल्क देना होगा। एक से दो वर्ष तक की देरी के मामलों में अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति और 100 रुपये शुल्क निर्धारित है। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में 100 रुपये के निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त अन्य लागू शुल्क तथा प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। नगर पालिका परिषद हाथरस के अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह ने बताया कि दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य हो गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर अवश्य दर्ज कराएं, ताकि अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया और अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।









