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सिकंदराराऊ (हसायन) 27 अप्रैल । मोहल्ला किला खेडा अहीरान स्थित नगर पंचायत कार्यालय में सूचना का अधिकार आरटीआई अधिनियम 2005 के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।अपीलकर्ता पुष्पेंद्र वीर प्रताप सिंह अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि नगर पंचायत द्वारा आरटीआई आवेदनों का जवाब समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।अपीलकर्ता के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2012 से 2017 तक हुए विकास कार्यों में विभिन्न योजनाओं से प्राप्त धनराशि की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।उनका कहना है कि नगर पंचायत स्तर पर छह से अधिक आरटीआई आवेदन बिना जवाब के लंबित हैं, जबकि कम से कम 4 मामले राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन हैं।बताया गया है कई मामलों में प्रथम अपील होने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद अपीलकर्ता को द्वितीय अपील के तहत राज्य सूचना आयोग की शरण लेनी पड़ी, जहां मामला विचाराधीन है।अपीलकर्ता ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने पीजी पोर्टल पर शिकायत दर्ज की थी।जहां अधिशासी अधिकारी संदीप सारस्वत के द्वारा यह कहा गया कि सभी आरटीआई का जवाब समय-समय पर दिया जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग बताई जा रही है।वहीं नगर पंचायत हसायन द्वारा प्रशासन को भेजे गए पत्र में यह कहा गया है कि उनके स्तर पर कोई भी आरटीआई लंबित नहीं है और सभी सूचनाएं समय से उपलब्ध कराई जाती हैं।इस पर अपीलकर्ता का कहना है कि कई मामलों में अब तक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।आयोग ने तीस अप्रैल 2026 को संबंधित जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को तलब करते हुए निर्धारित समय पर उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।सूचना उपलब्ध न होने की स्थिति को देखते हुए अनियमितताओं की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि विकास कार्यों और धनराशि का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा रहा, तो इसकी पारदर्शिता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।अब सभी की नजरें तीस अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।यह मामला न केवल पारदर्शिता बल्कि स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है

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