
हाथरस 08 मई । जनपद के चकबंदी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और न्याय के लिए सालों से भटक रहे एक किसान के धैर्य का बांध आखिर टूट गया। विभाग की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर नगला गढ़ू निवासी किसान देवेंद्र सिंह ने डीजल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिस ने किसी तरह किसान को शांत कराया, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक अमले और चकबंदी विभाग में फैले कथित भ्रष्टाचार की कलई खोलकर रख दी है।
पीड़ित देवेंद्र सिंह के अनुसार, उनकी 17 बीघा जमीन का मामला वर्ष 2012 से कोर्ट में लंबित है। उनके पिता राजवीर शर्मा ने वर्ष 1994 में इस जमीन का बैनामा कराया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 6 अगस्त 2025 को एटा स्थित बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) की अदालत ने फैसला देवेंद्र सिंह के पक्ष में सुनाया था। पीड़ित का आरोप है कि SOC कोर्ट से जीत मिलने के बाद फाइल नियम 109-क के तहत अमल दरामद (अभिलेखों में दर्ज करने) के लिए हाथरस के चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार के पास आई। आरोप है कि यहाँ सुनवाई के नाम पर केवल तारीखें दी गईं और अधिकारी द्वारा आदेश को खारिज करने की धमकियां दी गईं। देवेंद्र का कहना है कि काम के बदले उनसे 20 हजार रुपये की मांग की गई थी।
भैंस बेचकर दी रिश्वत, फिर भी नहीं हुआ काम
किसान देवेंद्र सिंह ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने अपनी भैंस 40 हजार रुपये में बेची और उसमें से 19 हजार रुपये अधिकारी को दिए। इसके बावजूद उनका काम नहीं हुआ। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो उन्हें टालमटोल कर भगा दिया गया।
आदेश खारिज होते ही टूट गया सब्र
पीड़ित के मुताबिक, मामले में 23 अप्रैल को फैसला होना था, जिसे टाल दिया गया। शाम को जब उन्हें पता चला कि उनका प्रार्थना पत्र ही खारिज कर दिया गया है, तो वे टूट गए और कार्यालय परिसर में ही आत्मदाह की कोशिश की। इस घटना के बाद तहसील और चकबंदी कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। किसानों और स्थानीय लोगों ने विभाग के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।


























