
हाथरस 05 मई । सेंट फ्रांसिस इंटर कॉलेज (सीनियर विंग) के ऑडिटोरियम में मंगलवार को ‘शिक्षामित्र सम्मान समारोह एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। हाथरस के माननीय सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के तमाम दिग्गज जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से कार्यक्रम का डिजिटल शुभारंभ किया। ऑडिटोरियम में उपस्थित सभी लोगों ने मुख्यमंत्री के उद्बोधन, शिक्षा पर आधारित लघु फिल्म और छात्र उन्नयन कैलेंडर के विमोचन का सजीव प्रसारण देखा। मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद सांसद व अन्य अतिथियों ने शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय (18,000 रुपये) के प्रतीकात्मक ‘डेमो चेक’ वितरित किए।
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर उनके वर्षों के संघर्ष को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा, “वर्ष 1999 में मात्र 3,500 रुपये से शुरू हुआ सफर आज 18,000 रुपये तक पहुँचा है। शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की नींव हैं और सरकार उनके हितों के लिए सदैव तत्पर है।” सांसद ने मुख्यमंत्री द्वारा दी गई ‘कैशलेस इलाज’ की सुविधा का भी विशेष उल्लेख किया। जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर, सादाबाद विधायक प्रदीप कुमार और सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राणा ने संयुक्त रूप से कहा कि 2017 के बाद शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। ‘स्कूल चलो अभियान’ की सफलता में शिक्षामित्रों की भूमिका अतुलनीय है। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों के धैर्य और निष्ठा का सम्मान है। उन्होंने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे सेवाभाव के साथ बच्चों की शैक्षिक नींव को और मजबूत करें। मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित ने भी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक स्वागत गीत से हुई। अंत में मंच पर मौजूद अतिथियों को स्मृति चिन्ह और मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कृति ‘गोदान’ भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, पूर्व विधायक सुरेश प्रताप गांधी, बीएसए, डायट प्राचार्य और भारी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।

























