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हाथरस 01 मई । न्यायालय ने बच्चा तस्करी के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए 8 में से पांच लोगों को दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास व अर्थ दंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार राजेश गोस्वामी पत्नी स्व. सत्य प्रकाश गोस्वामी निवासी मुरसान गेट स्थित जागेश्वर गेट नंबर 2 ने 9 मई, 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि आज सायं समय करीब 6:30 बजे उसका नाती कविश घर के बाहर खेल रहा था जिसकी उम्र करीब 4 वर्ष थी, कहीं चला गया है। रिपोर्ट दर्ज करते हुए पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी थी। घटना के मामले में पुलिस ने न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल करते हुए कहा कि मोनू पाठक व नेहा पाठक द्वारा हाथरस से बालक कविश को 9 मई, 25 को सायं 06.30 बजे हाथरस के मुरसान गेट स्थित जागेश्वर गेट नंबर-2 थाना कोतवाली हाथरस से मानव तस्करी के उद्देश्य से अपहृत किया था। बच्चे को ट्रास्पोर्ट करते हुए आन्ध्रप्रदेश के विजयवाड़ा ले जाया गया। रास्ते से ही अपहृत बालक कविश की तस्वीरें व वीडियो बनाकर तस्करी गैंग में जुड़े मेंहदी पाटला राघवेन्द्र को भेजी। जिसका बतौर विक्रय रु. 1,80, 000 में सौदा हुआ। जबकि मेंहदी पाटला राघवेन्द्र द्वारा अपहृत बालक कविश को आगे विक्रय हेतु उसके फोटो व वीडियो क्लिप को बतौर विक्रय बोडेडा मल्लिकार्जुन राव को भेजे गये। अभियोज पक्ष के मुताबिक आरोपी मोनू पाठक, नेहा पाठक, मेंहदी पाटला राघवेन्द्र व सुब्बालक्ष्मी को अपहृत बालक कविश के साथ विजयवाड़ा के इलूरू रोड स्थित होटल ताज से बरामद किया गया। जबकि बोडेडा मल्लिकार्जुन राव को बच्चे की तस्करी के लिए भेजी गई क्लिपो के आधार पुलिस ने मोबाइल लोकेशन को ट्रेंस कर आरोपी बोडेडा मल्लिकार्जुन राव तक पहुंच गई और 15 मई, 2025 को पड़ेरू बस स्टैण्ड विशाखापत्तनम आन्ध्र प्रदेश से उसे गिरफ्तार किया था।

हालांकि पुलिस ने इस मामले में राजेश उर्फ उमेश, सोनिया मिश्रा एवं मधुरानी शर्मा को भी आरोपी बनाया था, लेकिन इन तीनों आरोपियों की ओर से बतौर बचाव पक्ष पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष वशिष्ठ के तार्किक और मजबूत तथ्यों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया और इस तर्क को ध्यान में रखते हुए कि किसी भी निर्दोष को सजा ना हो, के आधार पर दोष मुक्त कर दिया। जबकि मोनू पाठक, नेहा पाठक, मेंहदी पाटला राघवेन्द्र, सुब्बालक्ष्मी एवं बोडेडा मल्लिकार्जुन राव को बीएनएस की धारा-143 (4) के तहत दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास व 20-20 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष की ओर से एएडीसी अधिवक्ता गोविंद वशिष्ठ, कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी हरि श्याम व पैरोकार आरक्षी रामकुमार ने सराहनीय पैरवी की है।

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