
हाथरस 18 अप्रैल । उत्तराखण्ड राज्य के छात्र अब अपने पाठ्यक्रम में हाथरस जिले की सासनी तहसील के नगला मिश्रिया नामक ग्राम में जन्मे साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचना पढ़ेंगे। रेलवे इंजीनियर एवं साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचना ‘ऐसा वर दो’ विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा कक्षा-4 के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशित ‘वीणा’ नामक पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित की गयी है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली की अनुमति एवं सहयोग से प्रकाशित इस पुस्तक का आरंभ त्रिलोक सिंह ठकुरेला की प्रार्थना ‘ऐसा वर दो’ से किया गया है। त्रिलोक सिंह ठकुरेला राजस्थान साहित्य अकादमी के ‘शंभूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार’ सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित साहित्यकार हैं। उनकी रचनाएँ अनेक राज्य सरकारों की विभिन्न हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित की गयी हैं। उल्लेखनीय है कि त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने कुण्डलिया छंद के उत्थान के लिए अद्वितीय कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं के अनुवादित बाल कहानी संकलनों सहित लगभग एक दर्जन बाल कहानी संकलनों का सम्पादन किया है। नया सवेरा, काव्यगंधा, समय की पगडण्डियों पर, आनन्द मंजरी और सात रंग के घोड़े उनकी चर्चित काव्य कृतियाँ हैं।


























