
हाथरस 12 सितम्बर। जनपदवासियों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अतुल वत्स ने पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के साथ जिला चिकित्सालय एवं जिला महिला चिकित्सालय का भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान जिलाधिकारी ने महिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण करते हुए गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. प्रवीण भारती एवं डॉ. अनूप शर्मा से विस्तार से चर्चा की।
जिलाधिकारी ने चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ से सिजेरियन ऑपरेशन बढ़ाने में आने वाली समस्याओं की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि ऐसी गर्भवती महिलाओं को समय रहते चिन्हित किया जाए, जिनके पिछले गर्भ के दौरान अथवा वर्तमान गर्भावस्था में ऐसी बीमारी या जटिलता हो, जिसके कारण सिजेरियन ऑपरेशन आवश्यक हो सकता है। उन्होंने कहा कि महिला चिकित्सक की जांच अथवा अल्ट्रासाउंड के माध्यम से ऐसी महिलाओं की पहचान गर्भावस्था के आठवें माह में ही कर ली जाए। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ऐसी महिलाओं की सूची तैयार कर उन्हें समय से सिजेरियन प्रसव के संबंध में आवश्यक जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराएं, ताकि सुरक्षित प्रसव जिला महिला चिकित्सालय में ही कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने जिला महिला चिकित्सालय में 100 सिजेरियन ऑपरेशन कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निजी क्षेत्र के तीन महिला रोग विशेषज्ञों को आनकाल व्यवस्था के आधार पर अनुबंधित किया गया है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रत्येक सिजेरियन ऑपरेशन के लिए चार हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा।
इसके बाद जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन 50 शय्यायुक्त क्रिटिकल केयर यूनिट का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालित होने के बाद यहां भी सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा शुरू की जाएगी। इससे महिला चिकित्सालय में सीमित वार्ड क्षमता की समस्या का समाधान होने के साथ अधिक संख्या में गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन प्रसव एवं बेहतर चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इसके उपरांत जिलाधिकारी ने जिला चिकित्सालय के नवीन संचालित इमरजेंसी ब्लॉक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों से बातचीत कर अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का फीडबैक भी प्राप्त किया। निरीक्षण के दौरान करीब 18 माह के भर्ती बच्चे आर्यन की मां से भी जिलाधिकारी ने बातचीत की। उसकी मां ने बताया कि बच्चे में खून की अत्यधिक कमी है और निजी चिकित्सक द्वारा उपचार के लिए काफी धनराशि मांगी गई थी, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह निजी अस्पताल में उपचार कराने में सक्षम नहीं थी।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बच्चे को फ्रेश ब्लड की आवश्यकता है। इस पर जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक से रक्तदाता की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया। पुलिस अधीक्षक के सहयोग से कुछ ही समय में रक्तदाता की व्यवस्था कर बच्चे को एक यूनिट रक्त उपलब्ध कराया गया। अन्य भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों ने भी जिला चिकित्सालय में उपलब्ध कराई जा रही इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इमरजेंसी भवन के पीछे जलभराव की समस्या का भी संज्ञान लिया। उन्होंने इसके स्थायी समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी (राजस्व एवं वित्त) को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला अस्पताल के मुख्य द्वार से इमरजेंसी ब्लॉक तक सड़क निर्माण कराने के निर्देश दिए, ताकि मरीजों एवं उनके तीमारदारों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।








