हाथरस 23 जून। आगरा रोड स्थित ठाकुर मदन मोहन जी मंदिर परिसर में वरिष्ठ साहित्यकार वासुदेव उपाध्याय के संयोजन में एक भव्य आध्यात्मिक-साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित संतोष मुखिया ने की, जबकि संचालन राकेश कुमार रावत ने किया। मुख्य अतिथि चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने माँ शारदे के चित्र पर पीत वस्त्र अर्पित कर एवं पुष्पांजलि देकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात बाबा देवी सिंह निडर ने माँ शारदा वंदना प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी में विभिन्न कवियों और साहित्यकारों ने भक्ति, मानवता, प्रेम, करुणा तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित रचनाओं का पाठ किया। रामजीलाल शिक्षक ने भक्ति के महत्व पर आधारित कविता प्रस्तुत की, जबकि प्रभु दयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने प्रेम और करुणा को ईश्वर का वास्तविक स्वरूप बताया। श्याम बाबू चिंतन ने जनकल्याण और मानवता से जुड़ी सार्थक कविता की महत्ता पर प्रकाश डाला। अपने विचार व्यक्त करते हुए भगवती प्रसाद शर्मा ने कहा कि साहित्य मनुष्य को संस्कार, संवेदना और सदाचार का मार्ग दिखाता है, जबकि आध्यात्मिकता जीवन को उद्देश्य प्रदान करती है। मुख्य अतिथि चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि जब साहित्य में अध्यात्म का आलोक जुड़ता है, तब शब्द समाज परिवर्तन का संकल्प बन जाते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भाषा और सनातन परंपराओं को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए साहित्यकारों को समाज का मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम संयोजक वासुदेव उपाध्याय ने सत्संग, साहित्य और संस्कारों के माध्यम से प्रेम एवं सद्भावना के प्रसार का संदेश दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित संतोष मुखिया ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और आध्यात्मिक चेतना उसके जीवन मूल्यों की आधारशिला है। इस अवसर पर बाबूराम शर्मा, चौधरी अनिल कुमार, ओम प्रकाश मुखिया, पंडित विष्णु शास्त्री, पप्पू पाठक, एम.पी. गौतम, सुरेश चंद तिवारी, हरि शंकर वर्मा, पंडित नित्यानंद शर्मा, जमुना प्रसाद शर्मा एवं वेद प्रकाश शास्त्री सहित अनेक साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


























