
हाथरस 30 अक्टूबर। दीपावली के त्योहार को लेकर शहर से लेकर देहात तक तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बाजारों में जहां सजावटी सामान और रोशनी के लिए तरह-तरह की झालरों की मांग बढ़ रही है, वहीं मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगर भी दिन-रात मेहनत कर त्योहार की तैयारी में जुटे हैं। इसी क्रम में हाथरस 24 डिजिटल न्यूज़ चैनल की टीम शहर के निकटवर्ती गांव सुरंगपुरा पहुंची और दीपक तैयार कर रहे कारीगरों से बातचीत की।
कारीगरों ने बताया कि दीपावली पर मिट्टी के दीपकों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। सदियों से लोग इस त्योहार पर मिट्टी के दीपक जलाकर घरों को रोशन करते आ रहे हैं, लेकिन बदलते समय के साथ अब लोग मिट्टी के दीपकों की जगह चाइनीज झालरों और अन्य सजावटी सामान का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे उनके पारंपरिक व्यवसाय पर असर पड़ रहा है।
कारीगरों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत करके मिट्टी से दीपक और अन्य कलाकृतियां तैयार करते हैं। मिट्टी के दीपक बनाकर ही कई गरीब परिवार अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। दीपावली उनके लिए केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत से कमाई करने का एक बड़ा अवसर भी है। ऐसे में बाजार में मिट्टी के दीपकों की मांग कम होने से उनकी आजीविका प्रभावित होती है।
कारीगरों ने शहरवासियों से अपील की कि इस दीपावली अपने घरों को मिट्टी के दीपकों से रोशन करें और अधिक से अधिक स्वदेशी दीप खरीदें। इससे भारतीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा मिलने के साथ ही मेहनत करके अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले कुम्हारों को भी आर्थिक मदद मिलेगी। उनका कहना है कि लोगों का छोटा-सा सहयोग भी इन कारीगरों के परिवारों की दीपावली खुशियों से भर सकता है।










