मोदी कह रहे रोजाना, कोरोना विश्व छोड़ो न 

हाथरस 06 अप्रैल । कोरोना को लेकर पूरा देश एक जुट है। सभी अपने-अपने तरीके से लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।...

सिकन्दराराऊ :  होली मिलन पर हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन

सिकन्दराराऊ 09 मार्च | होली मिलन के अवसर पर कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें आयोजित कवि देवेंद्र शूल, आयोजक युवा कवि विवेकशील राघव ओमप्रकाश सिंह भद्र पाल सिंह...

अकबर सिंह अकेला की कलम से – “कोरोना”

कोरोना १.लाइलाज़ यह रोग भयानक, बिगड़ गए सब कथे कथानक। गणित गड़बड़ा गया सभी का, घुसा देश मेंआइ अचानक ।। २. भारत सहित विश्व है हतप्रद, पार करी कोरोना हर...

अवशेष मानवतावादी का जन जागरण गीत

कोरोना की मार से आओ खुद को दूर रखें हम कोरोना की मार से। और बचायें इस दुनिया को भय से, हाहाकार से। खुद भी चेतें और सभी...

कवि शिव कुमार ‘दीपक’ की रचना

"दीपक "की कुण्डलियां कन्या बोली गर्भ से , माँ मत मुझको मार । मैं भी तेरा रूप हूँ , कुछ तो सोच विचार ।। कुछ तो सोच विचार , बनूँ...

कु० राखी सिंह शब्दिता की गजल

ग़ज़ल तुमको भी मुहब्बत है बता क्यूं नहीं देते । रस्मों को वफ़ाओं की निभा क्यूं नहीं देते ।। हंसकर के मुझे देते हैं वो दर्दे- जुदाई...

‘आह का अनुवाद’ गीतकार – इन्द्रपाल सिंह “इन्द्र”

------आह का अनुवाद----- अश्रु की गंगा नयन से पीर ने जब-जब उतारी, याद आती है तुम्हारी....याद आती है तुम्हारी.... मौन साधा है अधर ने पूर्ण है पर...

मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता अवशेष मानवतावादी द्वारा

मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता ................................................... मंदसौर की घटना ने फिर से जनमानस हिला दिया। तार तार मानवता कर दी दानवता को खिला दिया।। आग क्रोध की...

अकबर सिंह अकेला की एक कविता –

वर्षा झमझम हो रही, मौसम भी परवान। हवा निराली चल रही, पंछी गाउत गान।। दिन में अँधियारी झुकी, बिल्कुल रात समान। लुका छिपी बदरा करें, सूरज अंतर ध्यान।। सांय काल में लग...

अकबर सिंह अकेला की कविता पानी – पानी

पानी पानी नहिं रहा, पानी बना विशेष | मात भारती कौ भुवहिं, रूप कुरूपहिं भेष ||1|| तापमान की बेरुखी, इसकी कुत्सित चाल | जन मानस का हो रहा,...

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