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हाथरस 10 जून। करीब दस वर्ष पुराने रोकेन्द्र सिंह अपहरण एवं हत्या कांड में माननीय एडीजे-01 न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। मामला 14 जनवरी 2016 को थाना हाथरस गेट क्षेत्र के गांव लहरा निवासी चंद्रपाल सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। चंद्रपाल सिंह ने अपने पुत्र रोकेन्द्र सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान सामने आया कि 13 जनवरी 2016 की शाम रोकेन्द्र सिंह का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी।

अभियोग के अनुसार, अकूर इंटर कॉलेज क्षेत्र निवासी रिंकू उर्फ रमन, उसकी पत्नी कुसुम गुप्ता तथा सुनील पुत्र नंदलाल कुशवाह ने कथित रूप से रोकेन्द्र सिंह को फोन कर बुलाया और उसका अपहरण कर लिया। बताया गया कि रोकेन्द्र पहले रिंकू की गाड़ी पर चालक के रूप में कार्य करता था तथा दोनों पक्षों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। मामले की विवेचना और न्यायालय में चले विचारण के बाद एडीजे-01 न्यायालय ने अभियुक्त कुसुम गुप्ता एवं सुनील को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। वहीं, मामले में नामजद अन्य दो आरोपी मुकेश और रूपचंद को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय गंभीर अपराधों में प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।

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