सिकन्दराराऊ 24 जून। निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन आज 15वें दिन भी पूरे जोश और मजबूती के साथ जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में चल रहे धरना-प्रदर्शन एवं कलमबंद हड़ताल के दौरान आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जनहित, रोजगार और पारदर्शिता से जुड़े इस मुद्दे पर उनका संघर्ष अंतिम निर्णय तक जारी रहेगा। धरना सभा की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने की, जबकि संचालन जय प्रकाश गुप्ता एडवोकेट ने किया। वक्ताओं ने कहा कि निबंधन विभाग का निजीकरण केवल अधिवक्ताओं, कातिबों और कर्मचारियों का विषय नहीं है, बल्कि यह आम जनता की सुविधा, सरकारी जवाबदेही और पारदर्शी व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। आंदोलन को उस समय नई ऊर्जा मिली जब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आगरा एवं सिकन्द्राराऊ विधानसभा के संभावित प्रत्याशी राकेश बघेल, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी बनी सिंह बघेल, समाजवादी विधानसभा के संभावित प्रत्याशी धीरज पाण्डेय तथा समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुशवाहा धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों और समस्याओं को प्रदेश स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। इस दौरान राकेश बघेल ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय से दूरभाष पर वार्ता कराई। नेता प्रतिपक्ष ने आश्वासन दिया कि निबंधन विभाग के निजीकरण का मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा। वहीं राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए इस विषय को राज्यसभा में उठाने का भरोसा दिलाया। करहल विधायक तेज प्रताप यादव ने भी आंदोलनकारियों के पक्ष में खड़े होने की बात कहते हुए कहा कि इस जनहित के मुद्दे को विधानसभा में मजबूती से रखा जाएगा।
राकेश बघेल ने कहा कि समाजवादी पार्टी निजीकरण के खिलाफ चल रहे इस संघर्ष में आंदोलनकारियों के साथ पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। वहीं बनी सिंह बघेल एवं जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुशवाहा ने भरोसा दिलाया कि आंदोलनकारियों की मांगों को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचाया जाएगा। धरना स्थल से आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लेती, तब तक धरना-प्रदर्शन और कलमबंद हड़ताल अनवरत जारी रहेगी। लगातार 15 दिनों से जारी यह आंदोलन अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन चुका है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल रोजगार बचाने का नहीं, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और सरकारी सेवाओं की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। इस अवसर पर रोजगार बचाने का नहीं, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और सरकारी सेवाओं की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। उपस्थित रहे राजेश बघेल (सचिव), गौरी शंकर गुप्ता,इन्द्रपाल सिंह यादव,देवेंद्र दीक्षित शूल, अवनेश कुमार शर्मा, महेश चन्द्र अंजाना, वीरपाल सिंह यादव,भरत सिंह कुशवाह, कल्लू सिंह कुशवाह, उदयवीर सिंह, विपिन कुमार, रमेश यादव, सलीम कुरैशी, प्रियांशू दरगढ़, योगेंद्र पुंढीर, रूपेंद्र बघेल, दीपेश पाठक,आनन्द कुमार, राहुल वर्मा,राजेश यादव, देवेंद्र बघेल,रंजीत पौरुष, जितेंद्र कुमार,सीपी बघेल,राहुल चौहान, देवेंद्र कुमार संत आदिसहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित रहे।


























