
नई दिल्ली 26 जून । भारत में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। अमेरिकी दवा कंपनी एली लिली एंड कंपनी (Eli Lilly) ने अपनी अत्याधुनिक कैंसर रोधी दवा ‘टैनस्ट्राइव’ (Tanstrive) को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। यह दवा विशेष रूप से उन मरीजों के लिए विकसित की गई है, जिनके कैंसर का कारण RET (आरईटी) जीन में होने वाला म्यूटेशन होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह दवा पारंपरिक कीमोथेरेपी से अलग टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy) के सिद्धांत पर काम करती है। जहां कीमोथेरेपी शरीर की स्वस्थ और कैंसरग्रस्त दोनों प्रकार की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है, वहीं टैनस्ट्राइव सीधे RET जीन में हुए बदलाव से उत्पन्न असामान्य संकेतों को रोकती है। इससे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि धीमी पड़ सकती है और उपचार अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है। कंपनी ने इस दवा को 40 मिग्रा, 80 मिग्रा, 120 मिग्रा और 160 मिग्रा की चार अलग-अलग डोज़ में उपलब्ध कराया है। चिकित्सकों की सलाह के अनुसार मरीजों को इसे दिन में दो बार लेना होगा। हालांकि, यह आधुनिक उपचार काफी महंगा है। कंपनी के अनुसार, 14 दिनों की दवा वाले एक बॉक्स की कीमत लगभग 2.15 लाख रुपये रखी गई है। ऐसे में यह उपचार फिलहाल सीमित मरीजों की पहुंच में हो सकता है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसके अधिक सुलभ होने की संभावना है।
एली लिली इंडिया के अध्यक्ष विंसलो टकर ने कहा कि टैनस्ट्राइव जैसी आधुनिक दवाएं भारतीय कैंसर मरीजों को बेहतर और अधिक प्रभावी उपचार का नया विकल्प उपलब्ध कराएंगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कैंसर के इलाज में जीन आधारित जांच (Genomic Testing) का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इलाज शुरू करने से पहले मरीज के जीन की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि कौन-सी दवा उसके लिए सबसे अधिक प्रभावी होगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए जीन-आधारित और लक्षित उपचार (Precision Medicine) भविष्य की चिकित्सा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं। हालांकि, यह दवा केवल उन्हीं मरीजों के लिए उपयोगी है जिनमें RET जीन म्यूटेशन की पुष्टि जांच के माध्यम से हुई हो। इसलिए मरीजों को बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के इस दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए।

























