सिकन्दराराऊ 1 नवंबर। अलीगढ़ से हसायन जा रही एक स्कॉर्पियो गाड़ी शनिवार रात करीब 10 बजे अकराबाद थाना क्षेत्र में गोपी टोल से पहले फ्लाईओवर पर अचानक आग का गोला बन गई। चलती गाड़ी के अगले टायर में आग लगने के बाद देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि गाड़ी में सवार दोनों युवक समय रहते बाहर निकल आए और उनकी जान बच गई। हालांकि गाड़ी में रखे मोबाइल फोन सहित अन्य सामान जलकर राख हो गए। जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो में अनिल पुत्र चंद्रपाल (32 वर्ष) और सुनील पुत्र मुनेश पाल सिंह (35 वर्ष) सवार थे। दोनों अलीगढ़ से अपने पुश्तैनी गांव हसायन जा रहे थे। बताया गया है कि स्कॉर्पियो अलीगढ़ के पुराना हाथरस अड्डा निवासी प्रभाकर सिंह की है और दोनों युवक उनके कर्मचारी हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फ्लाईओवर पर चलते समय अचानक गाड़ी के अगले टायर में आग लग गई। इसी दौरान बराबर से गुजर रहे एक वाहन चालक ने चिल्लाकर दोनों युवकों को आग लगने की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने तत्काल गाड़ी को फ्लाईओवर पर किनारे खड़ा कर दिया। गाड़ी में खेती और ट्रैक्टर के इस्तेमाल के लिए करीब 150 लीटर डीजल तीन बड़े कैनों में रखा हुआ था। दोनों युवकों ने सूझबूझ दिखाते हुए सबसे पहले डीजल से भरे कैनों को गाड़ी से बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, जब दोनों युवक मोबाइल और गाड़ी की चाबी निकालने के लिए दोबारा गाड़ी की ओर लौटे, तब तक आग इंजन से होते हुए पूरी गाड़ी में फैल चुकी थी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और स्कॉर्पियो धू-धूकर जलने लगी। आग की चपेट में आने से दोनों के मोबाइल फोन सहित गाड़ी में रखा अन्य सामान जलकर खाक हो गया। दोनों युवक अपनी आंखों के सामने गाड़ी को राख होते देखते रह गए। घटना की सूचना मिलते ही अकराबाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। दोनों युवकों को सुरक्षित देखकर पुलिस ने राहत की सांस ली और तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आरोप है कि अलीगढ़ के ताला नगरी फायर स्टेशन से दमकल वाहन करीब 40 से 50 मिनट की देरी से मौके पर पहुंचा। तब तक स्कॉर्पियो पूरी तरह जल चुकी थी। मौके पर पुलिस, सरकारी एंबुलेंस और टोल की क्रेन तो मौजूद थी, लेकिन आग पर काबू पाने के लिए सबसे जरूरी दमकल वाहन समय पर नहीं पहुंच सका। इस घटना ने क्षेत्र में दमकल व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पूर्व किरतपुर टोल प्लाजा के पास भी एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जिसमें एक कार में सवार चार युवकों और एक कैंटर चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। उस समय भी ग्रामीणों ने फायर ब्रिगेड को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन दमकल वाहन के करीब एक घंटे बाद पहुंचने के कारण पांच जिंदगियां नहीं बचाई जा सकीं।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अकराबाद, किरतपुर टोल और सिकंदराराऊ जैसे क्षेत्रों में दमकल वाहन की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं है? यदि आसपास ही फायर ब्रिगेड उपलब्ध होती तो शायद स्कॉर्पियो को जलने से बचाया जा सकता था। वहीं, किरतपुर की घटना में भी दमकल की त्वरित उपलब्धता पांच लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकती थी। आखिर आग लगने की घटनाओं में 40 से 60 मिनट बाद पहुंचने वाली दमकल व्यवस्था का क्या औचित्य रह जाता है, जब तक दमकल वाहन पहुंचता है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका होता है। प्रशासन और सरकार को इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेकर अकराबाद, सिकंदराराऊ और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में दमकल वाहनों की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को समय रहते रोका जा सके।







