
हाथरस 31 अक्टूबर। संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी का पावन व्रत रविवार, 1 नवंबर को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर माताएं अपनी संतान की खुशहाली और मंगलकामना के लिए निर्जल व्रत रखेंगी तथा विधि-विधान से अहोई माता की पूजा-अर्चना करेंगी। भागवताचार्य आचार्य सीपूजी महाराज ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत मातृत्व, श्रद्धा और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करने और तारों को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। माताएं अपनी संतान के सुखमय जीवन, अच्छी सेहत, लंबी आयु और समृद्धि की कामना के साथ यह व्रत करती हैं।
आचार्य सीपूजी महाराज ने बताया कि इस वर्ष अहोई अष्टमी तिथि का प्रारंभ रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से होगा, जबकि अष्टमी तिथि का समापन 2 नवंबर सोमवार को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। वहीं तारों के दर्शन का समय शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजे के आसपास बताया गया है। चंद्रोदय का समय रात्रि लगभग 11:05 से 11:40 बजे के बीच रहने की संभावना है, हालांकि इसके लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा। आचार्य सीपूजी महाराज ने सभी माताओं एवं श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे व्रत के दौरान अपनी पारिवारिक परंपराओं और शास्त्रीय विधान के अनुसार पूजा-अर्चना करें। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक व्रत का वास्तविक फल श्रद्धा, विश्वास, पवित्रता और सच्चे मन से की गई प्रार्थना में निहित होता है। अंत में आचार्य सीपूजी महाराज ने समस्त श्रद्धालुओं को अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी की संतानों के स्वस्थ, सुखी एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।










