सिकंदराराऊ (हसायन) 19 अक्टूबर ।कस्बा में प्राचीन श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित हो रही श्रीरामलीला महोत्सव के तत्वावधान में आयोजित होने वाले प्राचीन लंकापति श्रीरावण दशानन के प्राचीन मेला के लिए नगर में आज तक कोई स्थाई जगह आवंटित नही होने के कारण श्रीरावण मेला हर वर्ष इधर से उधर भटकता हुआ दर दर भटक रहा है।प्राचीन श्रीरावण मेला का आयोजन नगर क्षेत्र के अलावा राजनैतिक एवं प्रशासनिक उपेक्षाओं के कारण आज तक रावण मेला के लिए कोई जगह स्थाई तौर पर नही मिल पाई है।कस्बा हसायन में प्राचीन समय से पूर्वज एवं बुर्जगों के कार्यकाल के समय से ही भगवान श्रीराम के नाम से संचालित होने वाला श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में प्रत्येक वर्ष श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी का गठन कर श्रीरामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाता है।श्रीराम युवा क्लब के पूर्व कार्यकर्ताओं के द्वारा आयोजित किए जाने वाला श्रीरामलीला महोत्सव के उपलक्ष्य में विजय दशमी के पर्व पर आयोजित होने वाला दशानन श्रीलंकापति रावण मेला को आज तक कोई पर्याप्त स्थान नही मिल पाया।यही कारण है कि कस्बा में दशानन श्रीलंकापति रावण मेला कभी इधर तो कभी उधर से लेकर अब तक चारों दिशाओं की परिक्रमा कर काफी उबाऊ हो चुका है।राजा अवागढ की सल्तनत एवं रियासत का हिस्सा रहे कस्बा हसायन में काफी समय पहले कोतवाली के पीछे मोहल्ला अहीरान से होकर गुजर रहे इन्द्रनगर सिकतरा-सलेमपुर गोपालपुर मार्ग के तिराहा स्थित ललिता वाले ऊसर में दशानंन श्रीलंकापति रावण का मेला का पिछले कई दशक से आयोजन होता चला आ रहा था।बाद में उस जमीन पर कृषि कार्य के लिए उपजाऊ भूमि होने के कारण कस्बा के किसान वर्ग के लोगों के द्वारा खेती कार्य प्रारंभ कर दिया गया।दशानन श्रीलंकपति रावण मेला ललिता वाले ऊसर भूमि से हटकर करीब दो वर्ष तक हसायन के नगला रति मार्ग स्थित गांव छीतूपुर हरीनगर के निकट एक किसान के खेत में किसान के द्वारा आयोजित करा दिया गया था।किसान के द्वारा उक्त जमीन को लीज पर दिए जाने के कारण दशानंन श्रीलंकापति रावण का मेला नगला रति मार्ग स्थित गांव छीतीपुर हरीनगर से हटने के बाद करीब दो वर्ष तक कस्बा के प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर बगीची के परिसर में आयोजित रहा था।तकरीबन पिछले पांच वर्षो दशानंन श्रीलंकापति रावण का रावण मेला अंडौली मार्ग पर विभिन्न जगहो पर आयोजित होता चला आता रहा।इस बार रावण मेला के लिए श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के पदाधिकारियो के द्वारा अंडौली रोड पर कृषि भूमि पर आयोजित होने वाले रावण मेला वाले स्थान पर किसानों के द्वारा रबी के सीजन की फसल की बुबाई किए जाने के कारण स्थान व जगह नही मिल पाने के कारण भरतपुर पुरदिलनगर मार्ग पर स्थित एक कृषि भूमि के खाली पडे प्रागंण में आयोजित होने के लिए स्थान चयनित कर दिया है।कस्बा के स्थानीय लोगों का कहना है कि दशानंन श्रीलंकापति रावण के मेला के लिए अभी तक कोई पर्याप्त आवंटित स्थाई स्थल नही मिल पाया है।जबकि हर बार सत्ताधारी दलों के राजनैतिक पदाधिकारियो एवं जनप्रतिनिधियो के द्वारा मेला में आकर मेला कार्यक्रम में अतिथि भी रहे है।मगर हर बार किसी ने कोई ध्यान ही नही दिया।पूर्वजों के जमाने से जन्मजात से इन्द्रनगर सिकतरा वाले गोपालपुर मोड के सहारे ललिता वाले ऊसर में ही रावण मेला आयोजित होता हुआ देखा है।रावण मेला के लिए प्रत्येक वर्ष स्थान परिवर्तन होने की वजह से कस्बा व देहात क्षेत्र के दर्शक लोग पथ भ्रमकता के अभाव में इधर उधर भटकते रहते है।