
हाथरस 12 अक्टूबर। दो दिन की बंदी के बाद सोमवार को खुली हाथरस मंडी समिति में धान लेकर पहुंचे किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं। सुबह करीब एक घंटे तक हुई रिमझिम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मंडी में खुले में रखी धान की उपज बारिश में भीग गई, जिससे किसानों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। जानकारी के अनुसार, सोमवार को हाथरस मंडी समिति में करीब 45 हजार कुंतल धान की आवक हुई थी। किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन सुबह अचानक बारिश शुरू होने से अफरा-तफरी मच गई। खुले में रखे धान को भीगने से बचाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई किसान अपनी उपज को समेटने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
जलभराव से भीगी किसानों की उपज
मंडी परिसर में कई स्थानों पर जलभराव होने के कारण धान पानी में भीग गया। बारिश शुरू होते ही किसानों ने अपनी उपज को बचाने का प्रयास किया। कई किसानों ने भीगे धान को समेटकर बोरियों में भरने की कोशिश की, लेकिन तब तक बड़ी मात्रा में धान बारिश की चपेट में आ चुका था। किसानों का कहना है कि बारिश के कारण उनकी उपज को भारी नुकसान पहुंचा है। धान भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है, जिससे बाजार में उचित कीमत मिलने में परेशानी हो सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
मंडी में इंतजामों को लेकर किसानों में नाराजगी
बारिश के दौरान खुले में रखी उपज को सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि मंडी में बड़ी मात्रा में धान की आवक होने के बावजूद उपज को बारिश से बचाने के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। किसानों ने मांग की कि मंडी परिसर में धान को सुरक्षित रखने, जलभराव रोकने और बारिश से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि उनकी मेहनत से तैयार फसल को नुकसान न उठाना पड़े। अब देखना होगा कि मंडी प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर क्या कदम उठाता है।








