
हाथरस 09 अक्टूबर। हाथरस के सांसद अनूप प्रधान के नाम और कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर दिल्ली की प्रतिष्ठित प्रकाशन कंपनी राजकमल प्रकाशन से करीब 11 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि सांसद निधि से किताबों की खरीद का काम दिलाने का झांसा देकर आरोपी ने प्रकाशन कंपनी को अपने जाल में फंसाया। इस मामले में राजकमल प्रकाशन के सीईओ मुकेश कुमार ने हाथरस गेट कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, आरोपी विमल गौतम पर आरोप है कि उसने सांसद अनूप प्रधान के लेटरहेड और उनके कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करते हुए एक फर्जी पत्र तैयार किया। इस पत्र के माध्यम से सांसद निधि से किताबों की खरीद का काम दिलाने का भरोसा दिलाया गया। आरोप है कि इसके बाद फर्जी पत्र को ई-साक्षी पोर्टल पर अपलोड कर प्रकाशन कंपनी को विश्वास में लिया गया और इसी प्रक्रिया के जरिए करीब 11 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब दिल्ली में राजकमल प्रकाशन के प्रतिनिधियों ने सांसद अनूप प्रधान से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संबंधित पत्र और किताबों की खरीद से जुड़े मामले की जानकारी सामने रखी गई। बताया जाता है कि जांच-पड़ताल के दौरान सांसद के लेटरहेड और हस्ताक्षरों के कथित फर्जी इस्तेमाल का मामला उजागर हुआ। इसके बाद प्रकाशन कंपनी की ओर से कानूनी कार्रवाई की गई। राजकमल प्रकाशन के सीईओ मुकेश कुमार की शिकायत के आधार पर हाथरस गेट कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मामला सांसद के नाम, लेटरहेड और हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग के साथ-साथ सरकारी पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड किए जाने से जुड़ा है। ऐसे में पुलिस के सामने पूरे घटनाक्रम की जांच करने, दस्तावेजों की सत्यता का पता लगाने और कथित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल करने की चुनौती है। इस मामले में अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित धोखाधड़ी किस तरह अंजाम दी गई, रकम किन माध्यमों से प्राप्त की गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल शिकायत के आधार पर मामला सामने आने के बाद हाथरस में यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है।








