
हाथरस 09 अक्टूबर। बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ में खुदाई के दौरान मिले कंकाल का रहस्य पूरी कहानी को उलझा देता है। कुछ ऐसी ही रहस्यमयी कहानी उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के मुरसान क्षेत्र के गांव गिलोंदपुर से सामने आई है, जहां सितंबर 2024 में एक मकान के आंगन में खुदाई के दौरान नरकंकाल बरामद हुआ था। मकान में रहने वाले पंजाबी सिंह ने दावा किया था कि यह नरकंकाल उसके पिता का है, जिनकी करीब 30 साल पहले हत्या कर शव को घर के आंगन में दफना दिया गया था। हालांकि, डीएनए जांच में नरकंकाल का डीएनए पंजाबी सिंह से मेल नहीं खाया। इसके बाद मामला और उलझ गया और आज भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह नरकंकाल किसका था और उसे मकान के आंगन में किसने दफनाया था? मामला थाना कोतवाली मुरसान क्षेत्र के गांव गिलोंदपुर का है। सितंबर 2024 में पंजाबी सिंह के मकान के आंगन में खुदाई के दौरान नरकंकाल मिलने से गांव में सनसनी फैल गई थी। पंजाबी सिंह ने आरोप लगाया था कि उसके पिता की करीब तीन दशक पहले हत्या कर दी गई थी और उनके शव को घर के आंगन में ही दफना दिया गया था। उसने इस मामले में गांव के राजवीर और अपने दो सगे भाइयों मुकेश व प्रदीप पर हत्या का आरोप लगाया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होना अभी बाकी है।
पंजाबी सिंह के मुताबिक, जब उसके पिता की कथित हत्या हुई थी, तब उसकी उम्र महज नौ वर्ष थी। समय बीतने के साथ वह इस घटना को भूल गया था। करीब दो साल पहले भाइयों के साथ हुए विवाद के दौरान उसे कथित तौर पर पिता के पास भेजने की धमकी दी गई। इसके बाद उसे अपने पिता की मौत से जुड़े पुराने मामले की याद आई और उसने पिता के शव की तलाश कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने मकान में खुदाई कराई तो जमीन के नीचे नरकंकाल बरामद हुआ। इस बरामदगी ने परिवार और गांव में कई सवाल खड़े कर दिए। नरकंकाल मिलने के बाद पुलिस ने उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए परीक्षण कराया। लेकिन जांच रिपोर्ट में नरकंकाल का डीएनए पंजाबी सिंह से मेल नहीं खाया। इस नतीजे ने मामले को नया मोड़ दे दिया। यदि नरकंकाल पंजाबी सिंह के पिता का नहीं था, तो फिर वह किसका था? वह कितने वर्षों से मकान के आंगन में दफन था और उसे वहां किसने दफनाया था? इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। डीएनए का मेल नहीं खाना अपने आप में नरकंकाल की वास्तविक पहचान स्थापित नहीं करता, इसलिए मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए आगे की जांच अहम है।
बुधवार को पंजाबी सिंह अपनी मां उर्मिला के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। यहां मीडिया से बातचीत में दोनों ने बताया कि घटना के करीब दो साल बाद भी उन्हें मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार है। पंजाबी सिंह ने सवाल उठाया कि उसके मकान के आंगन में मिला नरकंकाल आखिर किसका था और उसकी पहचान अब तक क्यों नहीं हो सकी? परिवार की मांग है कि मामले की सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि लंबे समय से बना रहस्य खत्म हो सके। गिलोंदपुर का यह मामला अब भी कई अनसुलझे सवालों के बीच खड़ा है। एक ओर पंजाबी सिंह अपने पिता की कथित हत्या का सच जानना चाहता है, वहीं दूसरी ओर डीएनए रिपोर्ट ने बरामद नरकंकाल की पहचान को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। करीब 30 साल पुराने कथित घटनाक्रम और सितंबर 2024 में हुई बरामदगी के बावजूद नरकंकाल की पहचान तथा उसे दफनाने की परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है। अब सबकी निगाहें पुलिस की आगे की जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस रहस्यमयी मामले से कब पर्दा उठेगा।









