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सिकन्दराराऊ (हसायन) 06 अक्टूबर। कस्बा के मोहल्ला किला खेडा स्थिति प्राचीन बगीची श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के तहत नौवे दिवस सोमवार पांच अक्तूबर की रात्रि में वृंदावन के श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीरामलीला कार्यक्रम का मंचन का आयोजन किया।श्रीरामलीला महोत्सव के कार्यक्रम के तहत श्रीरामलीला महोत्सव कार्यक्रम कमेटी के पदाधिकारियो व श्रीराधांचल लीला संस्थान के संचालक दल के कार्यकर्ताओ के द्वारा भगवान श्रीराम जानकी की आरती उतारकर स्तुति आराधना की।नौवें दिन श्रीराधांचल लीला संस्थान वृ्दावन के पात्रों के द्वारा भगवान श्रीराम के वनगमन लीला के दौरान रावण के दरबार में अंगद का पैर जमाना और अंगद-रावण संवाद लीला का मंचन किया।भगवान श्रीराम ने युद्ध से पहले अंतिम संदेशवाहक के रूप में बाली के पुत्र अंगद को रावण की सभा में भेजा।सभा में अंगद ने रावण को चुनौती दी कि यदि उसका कोई भी योद्धा उनका पैर जमीन से उठा दे, तो श्रीराम अपनी हार मानकर सीताजी को छोड़कर वापस लौट जाएंगे।रावण के बड़े-बड़े योद्धा और महारथी अंगद का पैर हिला तक नहीं पाए।अंत में जब रावण खुद अहंकारवश अंगद का पैर उठाने के लिए झुका, तो अंगद ने अपना पैर हटा लिया और कहा कि रावण को उसके पैर नहीं बल्कि श्रीराम के चरण पकड़ने चाहिए।श्रीरामलीला मंचन में लक्ष्मण शक्ति लक्ष्मण मूर्छा लीला का मंचन किया।भगवान श्रीराम के दूत बनकर गए अंगद के आने के बाद भगवान श्रीराम से रावण की सेना के बीच युद्ध में रावण के पुत्र मेघनाद इंद्रजीत) और लक्ष्मण के बीच भयंकर युद्ध हुआ।मायावी मेघनाद ने संकट में फंसकर लक्ष्मण पर शक्तिशाली शक्ति बाण ब्रह्म शक्ति का प्रहार किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े।लक्ष्मण जी को ब्रह्रा शक्ति लग जाने के बाद श्री हनुमान जी लक्ष्मण को मूर्छित देख भगवान श्रीराम के पास ले गए।भगवान श्रीराम के कहने पर लंका से सुषेन वैद्य को ले आए।सुषैन वैद्य ने श्रीराम को लक्ष्मण जी को चेतनावस्था में लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत से रात्रि में चमकने वाली संजीवनी बूटी को मंगाया।संजीवनी बूटी के सेवन कराते ही लक्ष्मण जी की चेतना वापिस हो गई।लक्ष्मण्जी की चेतना वापिस आते ही श्रीरामादल में जय-जयकार होने लगी।श्रोताओं ने भी श्री हनुमान जी व भगवान श्रीराम के जयकारे से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

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