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सिकन्दराराऊ (हसायन) 05 अक्टूबर। हसायन।कस्बा के मोहल्ला किला खेडा स्थिति प्राचीन बगीची श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के तहत अष्टम आठवें दिवस दिन रविवार चार अक्तूबर की रात्रि में वृंदावन के श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीरामलीला कार्यक्रम का मंचन का आयोजन किया।श्रीरामलीला महोत्सव के कार्यक्रम के तहत श्रीरामलीला महोत्सव कार्यक्रम कमेटी के पदाधिकारियो व श्रीराधांचल लीला संस्थान के संचालक दल के कार्यकर्ताओ के द्वारा भगवान श्रीराम जानकी की आरती उतारकर स्तुति आराधना की।आठवें दिन श्रीराधांचल लीला संस्थान वृ्दावन के पात्रों के द्वारा भगवान श्रीराम के वनगमन लीला के दौरान किष्कंधा कांड लीला का मनोहारी तरीके से भाव पूर्ण मंचन किया।श्रीरामलीला महोत्सव में मंचन के दौरान पात्रों ने दिखाया किष्किंधा कांड वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस का चौथा अध्याय है।जिसमें श्री राम और हनुमान की पहली मुलाकात,श्री राम-सुग्रीव मित्रता,बालि वध और माता सीता की खोज के साथ साथ अशोक वाटिका तहस नहस,लंका दहन की लीला है।इसी लीला के मंचन में भगवान श्रीराम लक्ष्मण जी सीता हरण हो जाने के बाद वन वन में भ्रमण कर सीता जी की खोज कर रहे थे।तभी किष्कंधा के ऋषिमूक पर्वत पर अपने भाई बाली के भय से भयभीत होकर रह रहे सुग्रीव ने दो राजकुमारों को घूमते देख मन में शंका हुई।तो सुग्रीव ने दोनो राजकुमारों की पहचान कराए जाने के लिए श्री बजरंग बली हनुमान जी को भेजा।लीला मंचन में भगवान श्रीराम से हनुमान मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया।लीला मंचन के दौरान सीता की खोज के दौरान श्रीराम और लक्ष्मण ऋषमूक पर्वत पर पहुंचते हैं।जहां सुग्रीव और हनुमान जी से उनकी भेंट होती है।अग्नि को साक्षी मानकर राम और सुग्रीव मित्र बनते हैं।सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा की लीला में सुग्रीव श्री राम को अपने भाई बालि के अत्याचार और अपनी पीड़ा की कहानी सुनाते हैं।श्री राम बालि का वध करने की प्रतिज्ञा करते हैं।भगवान श्री राम सुग्रीव को उनकी रक्षा करने का आश्वासन देकर युद्ध के लिए भेजते हैं और वृक्ष के पीछे छिपकर बालि को बाण मारते हैं।मृत्यु के पूर्व बालि को ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।बालि वध के पश्चात भगवान श्रीराम किष्किंधा का राजा सुग्रीव को बनाया जाता है।सीता खोज की तैयारी करने के लिए योजना प्रारंभ कर देते है।सु्ग्रीव किष्कधा का राज मिलने के बाद विषय भोग में रत होने के कारण भगवान श्रीराम के सीता माता की खोज वाले कार्य को भूल जाते है।वर्षा ऋतु के बाद जब भगवान श्रीराम लक्ष्मण जी को किष्कंधा के राजा सुग्रीव के पास भेजते है।तो लक्ष्मण जी अपने स्वभाव के कारण आक्रोश व्यक्त कर खरी खरी बाते सुनाते है।उसके बाद सुग्रीव सीता माता की खोज करने के लिए चारों दिशाओं में सीता जी की खोज के लिए वर्षा ऋतु बीतने के बाद सुग्रीव ने वानर सेना हनुमान,जामवंत,अंगद को चारों दिशाओं में माता सीता की खोज के लिए भेजा।दक्षिण दिशा में जाने वाले दल को हनुमान जी का नेतृत्व सौंपा गया।सीता मैया की खोज के बाद श्री हनुमान जी को सुग्रीव उनके बचपन में की गई लीला के बारे में ध्यान कराया।तो श्री हनुमान जी महाराज समुद्र को लांघने के लिए श्रीराम का नाम लेकर लंका पहुंचकर सीता की खोज कर अशोक वाटिका में बैठी सीता मैया को श्रीराम की मुद्रिका देकर विश्वास दिलाया।सीता माता को हनुमान जी महाराज पर श्रीराम भक्त के बारे में विश्वास हुआ।तो श्री हनुमान जी ने अशोक वाटिका को तहस नहस कर फल चखकर इधर उधर फेंककर तांडव मचाकर लंकादहन लीला का मंचन किया।

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