सिकन्दराराऊ (हसायन) 03 अक्टूबर। कस्बा के मोहल्ला किला खेडा स्थिति प्राचीन बगीची श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के तहत छठवे दिवस दिन शुक्रवार दो अक्तूबर की रात्रि में वृंदावन के श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीरामलीला कार्यक्रम का मंचन का आयोजन किया।श्रीरामलीला महोत्सव के कार्यक्रम के तहत श्रीरामलीला महोत्सव कार्यक्रम कमेटी के पदाधिकारियो व श्रीराधांचल लीला संस्थान के संचालक दल के कार्यकर्ताओ के द्वारा भगवान श्रीराम जानकी की आरती उतारकर स्तुति आराधना कर छठवें दिवस वनगमन लीला के मंचन के उपरांत अयोध्या से सुमंत भगवान श्रीराम,माता जानकी सीता,लक्ष्मण के साथ नगर भ्रमण करने के उपरांत रथ में बिठाकर अयोध्या के बाहर तमसा नदी पहुंच गए।भगवान श्रीराम के अयोध्या से वनगमन करने के लिए जाने के दौरान नगर वासी भगवान श्रीराम के पीछे पीछे रोते हुए चल दिए।भगवान श्रीराम तमसा नदी पर पहुंचने के बाद निषादराज गुहू से मिलन करने के बाद भगवान श्रीराम सभी को सोते हुए छोडकर वन के लिए रवाना हो गए।वनगमन लीला के दौरान श्रीराधांचल लीला संस्थान के पात्रों ने राम राम कहते कहते दशरथ को नीर बहाते छोड चले,आज हमारे राम अयोध्या छोड चले।।का ठानी रे मन में राम सीया भेज दिए री वन में,को सुनकर श्रोता व नगरवासी भावुक हो गए।वनगमन लीला के दौरान भगवान श्रीराम,माता जनकी सीता जी लक्षमण जी के साथ कस्बा के गली मुहल्लों में होते हुए भ्रमण कर वन के लिए चले गए।वनगमन लीला के कार्यक्रम में केवट संवाद मंचन के भगवान श्रीराम से केवट सरयू पार कराए जाने के लिए पहले पैर को धुलवाए जाने के लिए जिद करता है।केवट भगवान श्रीराम से कहता है कि भगवन मै जब तक नाव नही चढने दूंगा,जब तक मै आपके पैर नही धो लूंगा।भगवन आप के पैर छूते ही पत्थर जब अहिल्या बन सकती है।तो मेरी जीविका का एक मात्र साधन नाव भी कुछ बन गई तो क्या होगा।इस पर लक्ष्मण जी क्रोधित हो जाते है।जब भगवान केवट की बात सुनकर पैर धुलवाने की कह देते है।तो केवट अपनी पत्नी बच्चों के साथ लकडी के कठौता में गंगाजल लेकर भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श कर चरण धुलन के बाद चरणामृत का पान करने के बाद भगवान श्रीराम,माता जानकी,लक्ष्मण जी को नाव में बिठाकर सरयू पार कराए जाने के बाद जब भगवान श्रीराम उतराई में माता जानकी सीता जी की मुदरी उतारकर केवट को दी।तो भगवान श्रीराम से केवट ने मुदरी लेने से साफ इंकार करते हुए कह दिया कि तुम आए हमरे घाट जब हम आए तुम्हरे घाट हमें भव सागर से पार करा देना।प्रभु मै तो इक सरयू नदी का छोटा केवट हू और आप भव सागर के केवट हो।इसीलिए हमारी तुम्हारी बिरादी एक ही हुई।इसीलिए कोई भी बिरादर का भाई एक दूसरे के यहां पर कार्य करने पर कुछ स्वीकार नही करता।इसीलिए मै भी आपकी बिरादर का हुआ।सरयू नदी के बाद भगवान आगे बढकर वन में बैठे हुए थे।तभी भरत जी को चतुरंगी सेना के साथ भगवान श्रीराम से मिलने के लिए वन पहुंचे।तो भरत जी को वन की ओर सेना सहित आता देख लक्ष्मण जी क्रोधित होने लगे।तो भगवान श्रीराम ने कहा कि आवेश में आकर ऐसा कृत्य नही करना चाहिए,जिससे मनुष्य को कभी पछताना ना पडे।भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि पहले भरत को आने दो।भगवान श्रीराम को देख भरत जी नेत्रो को सजलकर अश्रुधार बहाने लगे।भरत जी ने भगवान श्रीराम से अयोध्या बापिस चलने के लिए कहा।तो भगवान श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए चौदह वर्ष तक वन गमन करने की बात कह दी।भगवान श्रीराम से भरत जी ने खडाऊ लेकर सिर पर रखकर बापिस अयोध्या को चल दिए।श्रीरामलीला महोत्सव कार्यक्रम ले चला भरत रे राम की निशानी,अंखियो में बहे अश्रुधार पानी को सुनकर श्रोता भाव विह्रवल हो गए।छठवे दिन की श्रीरामलीला महोत्सव में लीला मंचन सम्पन्न हो जाने के दौरान कोषाध्यक्ष अनमोल गुप्ता ने भगवान श्रीराम माता जानकी की हे राजा राम तेरी आरती उतारू कहकर आरती उतारी।आरती के गुणगान किए जाने से रात्रि में वातवरण भक्तिमय व धार्मिक दिखाई दिया।