सिकन्दराराऊ (हसायन) 28 सितम्बर। कस्बा के मोहल्ला किला खेडा स्थिति प्राचीन बगीची श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के तहत पहले दिन रविवार सत्ताइस सितंबर की रात्रि में वृंदावन के श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीरामलीला कार्यक्रम का मंचन का आयोजन किया।श्रीरामलीला महोत्सव के कार्यक्रम का मंचन होते देख श्रोता भाव विभोर हो गए।श्रीरामलीला महोत्सव के मंचन कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के पदाधिकारियो के द्वारा भगवान श्रीराम माता जानकी सीता जी की आरती उतारकर किया।श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा पहले दिन नारद मोह भंग लीला का मार्मिक मंचन किया।भगवान ब्रह्म जी के मानस देव पुत्र नारद ऋषि ने तपस्या कर भगवान श्री हरि का स्मरण कर स्तुति करते हुए वन घने जंगल में तपस्या करने लगे।ऋषि नारद के तपस्या किए जाने से देवताओ के राजा इंद्र घबराकर परेशान हो गए।राजा इन्द्र ने नारद ऋषि का तप भंग करने के लिए स्वर्ग से अप्सराएं भेजकर तपस्या भंग करने के लिए भेजा।अप्सराओं के द्वारा नारद की तपस्या भंग करने के लिए किए गए प्रयास के बाद नारद जी की तपस्या भंग करने में नाकाम रही।तो राजा इन्द्र ने कामदेव को भेजा।नारद जी ने काम पर विजय प्राप्त करते हुए क्रोध को भी जीत लिया।नारद जी ने काम क्रोध पर विजय प्राप्त करने के बारे में त्रिदेव भगवान शिव,भगवान नारायण,भगवान ब्रह्म जी के पास अपने काम क्रोध पर विजय पाने का अपने मुंह गुणगान कर बखान किया।नारद जी के द्वारा काम क्रोध पर विजय प्राप्त करने का स्वंय बखान एवं गुणगान करने पर अभिमान व अंहकार किए जाने के बारें में पता लगने पर भगवान श्री हरि विष्णु ने नारद के मोह रूपी अंहकार को समाप्त कर भंग करने के लिए मोह माया रच दी।रामलीला मंचन के दौरान नारद जी को भगवान श्री हरि विष्णु जी के द्वारा विश्व मोहनी से स्वंयवर चुने जाने के दौरान बंदर का रूप प्रदान कर दिए।नारद जी को जब अपने रूप के सुंदर प्रदान किए जाने के बजाए बंदर का रूप प्रदान किए जाने पर भगवान श्री हरि विष्णु जी को मृत्युलोक में मनुष्य जन्म में अवतार लेकर पत्नी वियोग में वन वन भटकने पर बंदर की सहायता लिए जाने का श्राप देकर क्रोध जताया।