
हाथरस 28 सितम्बर। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत लेखपालों द्वारा अतिरिक्त क्षेत्रों के बस्ते तहसील प्रशासन को सौंपे जाने से जिले की चारों तहसीलों में प्रशासनिक और जनसुविधाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो गए हैं। जिले में कुल 67 क्षेत्रों के बस्ते जमा कराए जाने की बात सामने आई है। इसके चलते इन क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विभिन्न मामलों की जांच और प्रमाणपत्र जारी करने समेत कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। तहसील परिसरों में पहुंच रहे फरियादियों को भी कई मामलों में बिना समाधान के लौटना पड़ रहा है। छात्रों को जाति, आय, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र मिलने में दिक्कतों के कारण नामांकन और विभिन्न फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है। वहीं वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के सत्यापन कार्य प्रभावित होने से लाभार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपदा पीड़ित किसानों और दुर्घटना बीमा के लाभार्थियों की जांच रिपोर्ट भी अटकने की स्थिति में है। इसके अलावा विरासत, आईजीआरएस, जनसुनवाई प्रार्थना पत्र, संपूर्ण समाधान दिवस एवं जिलाधिकारी जनता दर्शन के प्रार्थना पत्रों की जांच, शादी अनुदान, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष, विद्युत निगम से संबंधित जांच, किसान सम्मान निधि तथा बैनामा की दाखिल-खारिज जैसे कार्य भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। तहसील सासनी क्षेत्र के महमूदपुर बरसै, रुहेरी, सलेमपुर, सुसायत कलां, जसराना, टीकरी, मौहरिया, ममोता कलां, खुटिया सहित कई क्षेत्रों के बस्ते जमा किए गए हैं। तहसील सादाबाद में धाधऊ, गढ़-उमराव, अरौठा, बिसावर, कुजरोठी, सीस्ता, लोधई, तसींगा, कंजौली, आरती, मढ़ाभोज, खोंड़ा, गुखरौली, नसीरपुर, कुरमौरा, वेदई, जैतई, दोहई, बरामई और नानऊ समेत क्षेत्रों के बस्ते जमा हुए हैं। तहसील हाथरस क्षेत्र में लढ़ामू, बघना, दहोरा, महौखास, पुन्नेर, नहरोई, सिगरौली, कोरना-चमरुआ, मोहब्बतपुरा, बिसरात, बमनई, गढ़ी मधू, खेड़ा बरामई, लाढ़पुर, वाहनपुर और लहरा के अलावा तहसील सिकंदराराऊ के 22 अतिरिक्त क्षेत्रों के बस्ते भी जमा कराए गए हैं। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष देवव्रत गौतम के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में लेखपालों को अंतरमंडलीय स्थानांतरण की सुविधा देना, लेखपाल पद का न्यूनतम ग्रेड पे बढ़ाकर 2800 करना, लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर करना, राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए लंबित डीपीसी प्रक्रिया शीघ्र पूरी करना और यात्रा भत्ता बढ़ाना शामिल है। आंदोलन के कारण आम लोगों की परेशानी भी सामने आ रही है। बघना निवासी नत्थी सिंह ने बताया कि वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन में लेखपाल की रिपोर्ट लगती है, लेकिन कई दिनों से पेंशन का काम अटका हुआ है। उनका कहना है कि लेखपालों ने चार्ज छोड़ रखा है। वहीं एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत पर तैनात लेखपाल के चार्ज छोड़ने से प्रमाणपत्र और पेंशन संबंधी कार्य अचानक रुक गए हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।










