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अलीगढ़ 23 सितम्बर। मंगलायतन विश्वविद्यालय के कला विभाग द्वारा हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डी.लिट् की उपाधि प्राप्त वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. बाबूराम उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रो. बाबूराम ने भारतीय ज्ञान की अप्रतिम संपदा और हिंदी साहित्य के अंतर संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वेदों, उपनिषदों तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों में निहित गूढ़ ज्ञान, तथ्यों और नैतिक मूल्यों को वर्तमान सामाजिक व शैक्षणिक संदर्भों से जोड़कर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में यथोचित स्थान देना एक सराहनीय और क्रांतिकारी कदम है, जिससे शिक्षा के नए आयाम प्राप्त होंगे। आईईआर के निदेशक प्रो. दिनेश पांडेय ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्धतम सभ्यताओं में से एक है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इस ज्ञान की प्रासंगिकता और महत्व को रेखांकित किया। डीन रिसर्च प्रो. रविकांत द्वारा मुख्य वक्ता को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। संचालन डा. शगुफ्ता परवीन ने किया। इस अवसर पर आईईआर की विभागाध्यक्ष प्रो. दीपशिखा, डा. हृदेश कुमार, डा. देव प्रकाश पांडेय, डा. तारिक अनवर, डा. कविता शर्मा, डा. संजय, डा. फैजान, डा. अनुराधा, डा. रामकुमार पाठक आदि उपस्थित थे।

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