
हाथरस 11 सितम्बर। जैन समाज के महापर्व पर्युषण पर्व के चतुर्थ दिन लोहिया धर्मशाला, डिब्बा गली स्थित जैन स्थानक में ‘वाणी संयम दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आए स्वाध्याय बंधु महेंद्र जैन एवं सुलेख जैन ने ज्ञान चर्चा करते हुए श्रद्धालुओं को वाणी के संयम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वाणी मनुष्य के व्यक्तित्व और आचरण का आईना होती है। मधुर, हितकारी और सत्य वचन बोलना ही वास्तविक धर्म है। बिना सोचे-समझे बोले गए कटु शब्द दूसरों के हृदय को ठेस पहुंचाने के साथ ही कर्म बंधन का कारण भी बनते हैं। स्वाध्याय बंधुओं ने कहा कि वाणी पर नियंत्रण रखने से जीवन के अनेक विवाद और क्लेश स्वतः समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति को हमेशा सोच-समझकर और तोल-मोल कर बोलना चाहिए तथा दूसरों की निंदा और उपहास से बचना चाहिए। शांत एवं संयमित भाषा से रिश्तों में मिठास और समाज में सद्भाव बना रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पर्युषण पर्व के दौरान अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय मौन व्रत धारण करें तथा वाणी में विनम्रता, सरलता और माधुर्य लाने का संकल्प लें। कार्यक्रम में लोहिया धर्मशाला के प्रबंधक मंत्री सुरेश चंद्र जैन, जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन, जवाहरलाल शर्मा, मोहन लाल वर्मा, सुनील वर्मा, मनोज जैन, अतुल कुमार जैन एडवोकेट, राकेश जैन, सलिल जैन, विजय जैन, मयंक जैन, अनिल कुमार जैन, राज कुमार जैन, राज कुमार बठिया, वैभव जैन, अरुण जैन, मनु जैन, सोनू जैन, हर्ष जैन, मंजू जैन, पूजा जैन, रेनू जैन, पूनम जैन, लीना जैन सहित बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।







