सिकन्दराराऊ (हसायन) 10 सितम्बर । कस्बा के नगला रति मार्ग स्थित मोहल्ला अहीरान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी परिसर में प्रसव प्रक्रिया के दौरान दो नवजात शिशुओं की मौत का मामला सामने आया है।लगातार सामने आए इन दो मामलों से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और रात के समय उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।एक नवजात शिशु की मृत्यु हो जाने के बाद नवजात शिशु के परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियो को घेरना प्रारंभ कर दिया।इस दौरान पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियो के द्वारा पर्दा डालने के भरकस प्रयास किए गए।नवजात शिशुओं की मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में तैनात कार्यरत महिला पुरूष स्वास्थ्य कर्मियों में हडकंप मच गया।क्षेत्र के गांव खिटौली की रहने वाली पहली गर्भवती महिला वसुधा पत्नी निखिल प्रताप सिंह उम्र करीब सत्ताइस वर्ष को उसके ससुरालीजन परिजन दस सितंबर गुरूवार की मध्यकालीन रात करीब साढे बारह बजे प्रसव पीड़ा हुई।परिजन गर्भवती धात्री प्रसूता महिला पीडित मरीज बसुधा को एक सौ दो एंबुलेंस के माध्यम से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हसायन लेकर पहुंचे।सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात कार्यरत रात्रि कालीन महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री बतौर स्टाफ नर्स से प्रसूता महिला बसुधा का प्रसव कराया गया।महिला प्रसूता बसुधा का नार्मल सामान्य विधि से सुरक्षित तरीके से प्रसव प्रक्रिया के माध्यम से नवजात शिशु के रूप एक लडका उत्पन्न हुआ।परिजनों के अनुसार जन्म के बाद नवजात शिशु की हालत बिगड़ने लगी और महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने नवजात शिशु को ऑक्सीजन लगाए जाने की आवश्यकता बताई।और नवजात शिशु को आक्सीजन लगाए जाने के दौरान हल्की सामान्य रूप से सी.पी.आर.भी दी गई।नवजात शिशु के परिजनों का आरोप है कि नवजात शिशु के उत्पन्न हो जाने के दौरान नवजात शिशु की तबीयत बिगड जाने के बाद भी रात्रि में नवजात शिशु की बिगडती स्वास्थ्य हालात को देखने के लिए रात में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर रात्रि मध्यकालीन डयूटी पर तैनात चिकित्सक को महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने कई बार फोन भी किया।लेकिन चिकित्सक का रात्रि में मोबाइल दूरभाष फोन रिसीव नहीं हुआ। तो इसके बाद नवजात शिशु के परिवार की प्रसूता महिला के साथ आई दो महिलाओं के द्वारा रात्रि डयूटी कर रहे रात्रि कालीन चिकित्सक के कमरे का दरवाजा खटखटाया गया।लेकिन चिकित्सक ने रात्रि में नवजात शिशु की हालात बिगडने के बाद भी अपने कक्ष का दरवाजा नहीं खोला गया।इसके बाद दोनों महिलाए निराश होकर प्रसूता प्रसव कक्ष की ओर वापस लौट आईं।मृतक नवजात शिशु के परिजनों का आरोप है कि समय पर नवजात शिशु को ऑक्सीजन व उपचार की सुविधा उपलब्ध नही हो पाने के कारण नवजात शिशु की हालत बिगड़ती चली गई।नवजात शिशु की बिगडती हुई हालात को देखने के बाद जब काफी देर तक स्वास्थ्य सुविधाएं नवजात शिशु को मुहैया उपलब्ध नही हो पाई।तब उसे देर रात्रि भोर से पहले तीन बजे के लगभग नवजात शिशु को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात कार्यरत महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री स्टाफ नर्स मैंटेंस के रूप में कार्य कर रही स्टाफ नर्स के द्वारा चिकित्सक के मौजूद होने के बाद भी चिकित्सक के प्रसव कक्ष में नही आने पर जैसे तैसे रैफर स्लिप बनाकर हायर सेंटर जिला चिकित्सालय के लिए रेफर किया गया।लेकिन समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आक्सीजन व उपचार मुहैया नही हो पाने की वजह से नवजात शिशु ने रास्ते में ही दम तोड दिया।नवजात शिशु की रास्ते में ही मौत हो गई।नवजात शिशु के परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से एम्बूलेंस के माध्यम से ही जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचने पर चिकित्सकों ने नवजात शिशु को मृत घोषित कर दिया।गुरूवार की सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के परिसर में नवजात शिशु के परिजन मृत नवजात शिशु को लेकर बैठे और खड़े दिखाई दिए।घटना के बाद चिकित्सालय के परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया।दूसरे मामले में शिल्पी पत्नी विनोद उम्र करीब छब्बीस वर्ष निवासी गाँव कटरा मलाई ब्लाक व तहसील सासनी को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हसायन पर लाया गया।प्रसव के दौरान महिला ने मृत शिशु को जन्म दिया।
बताया गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रसव कक्ष के सामने ही नवजात शिशु देखभाल इकाई एनबीएसयू में तीन स्वास्थ्य कर्मचारी तैनात हैं।आरोप है कि घटना के दौरान रात में एनबीएसयू में एक भी स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं था।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रसव के बाद नवजात शिशु की हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल आवश्यक उपचार और ऑक्सीजन की सुविधा कैसे और क्यो नही उपलब्ध कराई गई।दो नवजात शिशुओ की मौत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हसायन की रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था,चिकित्सकों की उपलब्धता और नवजात शिशुओ की देखभाल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।हालांकि, दोनों मामलों में नवजात शिशुओ की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।बड़ा सवाल यह है कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नवजात शिशु देखभाल इकाई कक्ष में तमाम सुविधाएं उपलब्ध है।तो एनबीएसयू कक्ष के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती होने के बाद भी रात के समय वहां कोई स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद क्यों नहीं था? साथ ही प्रसव के बाद नवजात शिशु को समय पर आवश्यक उपचार और ऑक्सीजन की सुविधा क्यों नहीं मिल सकी?मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।एनबीएसयू में तैनात कार्यरत एक स्वास्थ्य कर्मी से जानकारी करने पर बताया कि हॉ में रात में एनबीएसयू में ही मौजूद था।और मेरी ड्यूटी भी थी।मृत हुए नवजात शिशु को देखने के दौरान उसकी मामूली पल्स चल रही थी।अमलाई कोड की पल्स चल रही थी।बच्चा ना स्टेबल था,टोटल मतलब ऐसे ही था।दूसरी चीज जो ऑक्सीजन सिलेंडर वाली थी।वह लगाई गईमगर नवजात शिशु स्टेबल नहीं हुआ।तो नवजात शिशु को रेफर करना पड़ा और दूसरा बच्चा गर्भ से ही मृतक पैदा हुआ था।





